
राधिका यादव सुसाइड केस, PC- Patrika
झांसी : शादी के चंद सात महीने… सपनों भरा संसार… और अचानक सब कुछ उजड़ गया। पति की हार्ट अटैक से मौत का गम 23 साल की नवविवाहिता राधिका यादव (ललिता उर्फ राधिका) सह न सकीं और शुक्रवार सुबह घर के बाथरूम में साड़ी के पल्लू से फंदा लगाकर अपनी जीवन-डोर हमेशा के लिए तोड़ दी।
घटना झांसी के प्रेमनगर थाना क्षेत्र की हंसारी मोहल्ले की है। राधिका की शादी इसी साल 13 अप्रैल 2025 को मॉरिस गंज निवासी विशाल यादव से धूमधाम से हुई थी। सात फेरे लिए, सात महीने हंसी-खुशी बीते, लेकिन अचानक दो महीने पहले विशाल को हार्ट अटैक आया और वे चल बसे। पति के जाने के बाद राधिका पूरी तरह टूट गई थीं। घरवाले लाख समझाते, लेकिन वो बार-बार यही कहतीं- 'अब जीने का कोई मतलब नहीं।'
सुबह करीब 8 बजे राधिका नहाने के बहाने कमरे में गईं और अटैच्ड बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। काफी देर तक बाहर न आने पर परिजनों ने आवाज लगाई। जब कोई जवाब नहीं मिला तो घबराकर दरवाजा तोड़ा गया। अंदर का नजारा देख हर कोई सन्न रह गया- राधिका साड़ी के पल्ले से पंखे पर लटकी हुई थीं। आनन-फानन में उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
राधिका ने एक पेज का सुसाइड नोट छोड़ा है जो हर आंख को नम कर देता है। उसमें लिखा है- 'मेरे पास अब खुद को जीने के लिए मोटिवेट करने का कोई ऑप्शन नहीं बचा है। आप सबने मेरे लिए दुनिया का सबसे अच्छा पार्टनर चुना था, लेकिन मेरी किस्मत इतनी खराब थी कि सब छिन गया। दीदी लोग रक्षाबंधन पर जरूर आना और भैया लोगों को राखी बांधना। मैं विशाल के बिना जी नहीं सकती।'
राधिका के चाचा ससुर देवेंद्र सिंह यादव ने बताया, 'विशाल के जाने के बाद राधिका दिन-रात रोती थी। हमने बहुत समझाया, लेकिन वो अधूरी सी हो गई थी। सुसाइड नोट में उसने खुद लिखा है कि वह विशाल के बिना नहीं जी सकती। कोई बाहर का दबाव या साजिश नहीं थी, बस पति का गम था जो वो सह नहीं पाई।' पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया और मामले की जांच शुरू कर दी है। परिवार में मातम पसरा है- सात फेरे लिए थे खुशियां बांधने, लेकिन दो महीने के अंतराल में दोनों इस दुनिया से चल बसे। राधिका ने सिंदूर मिटने से पहले ही मांग सूनी कर ली।
Updated on:
05 Dec 2025 08:42 pm
Published on:
05 Dec 2025 08:41 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
