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सावधानः कहीं आप तो नहीं खा रहे मिलावटी अचार, फल-फूल रहा है कारोबार

लोहार्गल, चिराना, दीपपुरा, चंवरा सहित अन्य गांवों में लोग बड़े पैमाने पर घर-घर में अचार बनाने का काम करते हैं।

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पचलंगी। शेखावाटी के कैरी, कैर के अचार की क्षेत्र के साथ अन्य प्रदेशों में भी मांग रहती है। इस कारण झुंझुनूं जिले के पहाड़ी क्षेत्र के लोहार्गल, चिराना, दीपपुरा, चंवरा सहित कई गांवों में अचार बनाने का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है। इनमें कई फेरी वाले व्यापारी भी हैं जो गांव-गांव जाकर अचार बेचते हैं। लेकिन अचार खरीदने से पहले एक बार जांच-परख जरूर कर लें, क्योंकि अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में कुछ लोग मिलावट करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में खराब अचार आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

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घर घर में होता है अचार बनाने का काम

लोहार्गल, चिराना, दीपपुरा, चंवरा सहित अन्य गांवों में लोग बड़े पैमाने पर घर-घर में अचार बनाने का काम करते हैं। अचार के कारोबार से जुड़े गुलझारीलाल, रामेश्वर लाल, शांति देवी, गायत्री देवी सहित अन्य ने बताया कि सीजन के अनुसार अचार बनाया जाता है जो 12 महीने तक बिक्री के लिए काम में लिया जाता है। उनका दावा है कि वे किसी तरह की कोई मिलावट नहीं कर रहे। बता दें कि कैरी के अचार का भाव 200 -220 प्रति किलो , कैर के अचार का भाव 150 से 240, लेसवा के अचार का भाव 130 -140 रुपए व नींबू मिर्च के अचार का भाव 100 से 125 बताया जा रहा है।

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इसलिए जांचना जरूरी

अचार बनाने का कारोबार करने वाले कई व्यापारी खाद्य विभाग के मापदंड पूरे नहीं कर रहे हैं। विभाग से लाइसेंस नहीं लिया जाता। वहीं कई लोग अचार बनाने के लिए कैरी, लेसवा, मिर्च, नींबू आदि मंडियों से सस्ते दामों में सड़े, गले भी उठा लाते हैं। सस्ते के चक्कर में तेल व मसाले भी मिलावटी हो सकते हैं।

हाल ही में लोहार्गल में कई अचार व्यापारियों के यहां से सैंपल लिए हैं। शीघ्र ही अन्य गांवों में भी मिलावटी अचार बनाने के स्थानों को चिन्हित किया जाएगा व बड़ा अभियान चलाकर इसको बंद करवाया जाएगा। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जारी लाइसेन्स से ही यह कार्य किया जा सकता है। इसके लिए खाद्य सुरक्षा विभाग के सभी मापदण्डों को पूरा करना होता है।

महेंद्र चतुर्वेदी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी झुंझुनूं