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Karwa Chauth Special: पति से किया वादा निभा रही राजस्थान की भगवती देवी, हर करवा चौथ पर व्रत करती है शहीद वीरांगना

Karwa Chauth Special: श्यामपुरा-मैनाना निवासी कीर्ति चक्र विजेता शहीद हरिसिंह पायल की वीरांगना भगवती देवी अब भी हर साल करवा चौथ का व्रत रखती हैं। इस दिन वह 33 साल पहले पति से किया गया वादा याद करते हुए व्रत खोलती हैं।

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Bhagwati Devi Brave Wife Of Martyr Harisingh

Karwa Chauth Special: श्यामपुरा-मैनाना निवासी कीर्ति चक्र विजेता शहीद हरिसिंह पायल की वीरांगना भगवती देवी अब भी हर साल करवा चौथ का व्रत रखती हैं। इस दिन वह 33 साल पहले पति से किया गया वादा याद करते हुए व्रत खोलती हैं। वीरांगना पति से किए गए वादे को निभा भी रही हैं। 4 राजपूताना राइफल्स के जवान हरिसिंह पायल जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में पाकिस्तानी सीमा पर 29 अगस्त 1991 में शहीद हो गए थे। उस समय हरिसिंह के दो बेटी सुभिता और सरोज थीं। तीसरी बेटी सुनीता का जन्म शहादत के तीसरे दिन हुआ।

वीरांगना भगवती देवी बताती हैं कि उनके पति हमेशा ही बेटियों को बेटों से बढक़र मानते थे। शहीद होने से पहले करवा चौथ के दिन ही हरिसिंह ने यह वादा लिया था कि बेटियों को पढ़ा-लिखाकर आगे बढ़ाना है। हरिसिंह वीरगति को प्राप्त हुए, उस समय बड़ी बेटी की महज साढ़े चार साल की थी। इसके बावजूद भगवती देवी ने हिम्मत नहीं हारी। तीनों बेटियों को पढ़ाया-लिखाया। तीन में से दो बेटियां सरकारी नौकरी लग चुकी हैं। तीसरी बेटी भी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही हैं।

तीन में से दो बेटी लगी नौकरी
सुभिता चिड़ावा तहसील में वरिष्ठ सहायक तथा दूसरी बेटी सरोज सरकारी डॉक्टर है। वहीं सुनीता बीएड, एलटी तथा नेचुरोपैथी का कोर्स पूर्ण कर चुकी है।

सपना:बेटियां पढक़र आगे बढ़े
जवान हरिसिंह पायल का सपना था कि बेटियां भी बेटों से आगे निकल सकती हैं। उसने पत्नी से भी करवा चौथ पर वादा लिया था कि बेटियों को पढ़ाकर आगे बढ़ाना है। बतौर शहीद वीरांगना भगवती देवी, ग्रामीण अंचल में बेटी-बेटों में भेदभाव रहा है। उस समय भी लोगों ने बेटियों को पराया धन बताया था। मगर हमने बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं समझा।

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सातवीं तक पढ़ी हैं भगवती
वीरांगना भगवती देवी सातवीं तक पढ़ी हैं। हरिसिंह के शहादत के दिन गांव के लोगों को तार से हरिसिंह के शहीद होने की जानकारी मिल चुकी थी। मगर परिवार के लोगों ने भगवती की हालत देखते हुए उसे कुछ बताया नहीं। 31 अगस्त को भगवती देवी ने तीसरी बेटी सुनीता को जन्म दिया। उसके जन्म के पांच घंटे बाद जेठ ने हरिसिंह के शहादत की जानकारी दी, यह सुनकर एकबार तो भगवती देवी टूट सी गई लेकिन पति से किए गए वादे ने उसे हिम्मत बंधाई।

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