
अस्पताल में प्रसव करवाया, बेटी का पता चला तो मरने के लिए फेंक गए
मलसीसर(झुंझुनूं). बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान में देश में प्रशंसा बटोर चुके झुंझुनूं जिले की कड़वी सच्चाई सामने आई है। शिक्षा में अव्वल रहने वाले जिले में बेटी जन्म को अभी तक अभिशाप समझा जाता है। कस्बे में बुधवार शाम को करीब पांच बजे बंको के जोहड की गूण में कपड़ों में लिपटी मासूम लावारिस हालत में मिली। करीब 20 घंटे पहले जन्मी नवजात का प्रसव किसी निजी या सरकारी अस्पताल में प्रशिक्षित हाथों में हुआ है।
शाम करीब 5बजे युसुफ सिरोहा शौच के लिए जोहड के पास खुले मैदान की ओर जा रहा था। अचानक मासूम के राने की आवाज सुनाई दी। उसने तूरन्त घटना की जानकारी लोगों को दी।
खली सीसीटीवी कैमरों की कमी
कस्बे में फिलहाल एक दो जगह छोड कर सार्वजनिक जगहों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। घटना स्थल के पास राजकीय महाविद्यालय एवं बस स्टेण्ड होने के बावजूद सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हंै जिसके कारण घटना से संबंधित जानकारी जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड सकती है।
प्रशिक्षित हाथों से प्रसव
राजकीय बीडीके अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. वीडी बाजिया ने बताया कि प्रसव किसी निजी या सरकारी अस्पताल में प्रशिक्षित हाथों से हुआ है।उन्होंने बताया कि बच्ची के सिर, हाथ व पैरों में चोट के निशान है।शरीर नीला होने सहित शुगर लेवल काफी अधिक है।उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही है।गंभीर हालत को देखते हुए एसएनसीयू में भर्ती किया गया है।
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पिछले साल मिली थी एंजल व लक्ष्मी
केस एक
मुकुन्दगढ़ क्षेत्र स्थित घोडीवारा बालाजी मंदिर की सीढिय़ों पर अज्ञात नवजात को छोडकर चले गए थे। राजस्थान पत्रिका, लोगों व संगठनों के सहयोग से उसे बचाया गया था। बाद में उसे एंजल नाम दिया गया। अब वह सुरक्षित है।
बड़बर में मिली थी मासूम
बुहाना उपखण्ड के गांव बडबर में भी इस तरह की घटना हुई।जहां पर कोई अज्ञात बालिका को मंदिर की सीढिय़ों पर छोड़ गया।अगले दिन पुजारी पहुंचा तो ग्रामीणों को इसके बारे में बताया।बाद में संक्रमण से पीडि़त नवजात को झुंझुनूं भेजा गया।चिकित्सकों की देखरेख में इलाज शुरू किया।अस्पताल प्रशासन ने उसे लक्ष्मी नाम दिया।
Published on:
27 Feb 2019 09:49 pm
