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पढ़े-लिखों को आसान शिकार बनाकर करते हैं लाखों पर हाथ साफ

झुंझुनूं. अगर आपको यह लगता है कि ऑनलाइन ठगी का शिकार केवल अशिक्षित लोग होते हैं, तो यह विचार अपने दिल से निकाल दें। थानों में दर्ज मुकदमों पर गौर करें तो ठगी का शिकार होने वालों में अपने आपकों शिक्षित बताने वालों की संख्या कम नहीं हैं।
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पढ़े-लिखों को आसान शिकार बनाकर करते हैं लाखों पर हाथ साफ

झुंझुनूं. अगर आपको यह लगता है कि ऑनलाइन ठगी का शिकार केवल अशिक्षित लोग होते हैं, तो यह विचार अपने दिल से निकाल दें। थानों में दर्ज मुकदमों पर गौर करें तो ठगी का शिकार होने वालों में अपने आपकों शिक्षित बताने वालों की संख्या कम नहीं हैं। जबकि पुलिस व बैंक अधिकारियों की ओर से आमजन को खाते सम्बंधी किसी प्रकार की जानकारी नहीं देने के लिए चेताया जाता है।

जानकारी के मुताबिक स्वयं को बैंक का अधिकारी बताकर, क्लोन तैयार कर, एटीएम कार्ड ब्लॉक करने का झांसा देकर ठग कुछ ही देर में खाता साफ कर देते हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2017 में जिले के विभिन्न थानों में 13 प्रकरण दर्ज हुए थे। ठगों के झांसे में आने वालों में 70 प्रतिशत लोग शिक्षित वर्ग के रहे हैं। पुलिस सूत्रों की माने तो वर्ष 2016 में साइबर क्राइम के चार मुकदमें दर्ज हुए थे। लेकिन साइबर अपराधों के मुकदमों की संख्या बढ़ते देखकर वर्ष 2017 में कोतवाली को नोडल थाना बनाया गया था। लेकिन साइबर से जुड़े मामलों की संख्या को बढऩे थानों पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच के आदेश जारी किए गए थे।

सहयोगी बनकर करते ठगी
ऑनलाइन ठगी के अलावा जिले में पिछले कुछ महीनों से ऐसा गिरोह भी सक्रिय है जो कि मदद करने के बहाने लोगों का एटीएम कार्ड बदलकर रुपए निकाल लेता था। गिरोह के सदस्य महिलाओं व बुजुर्गों को आसान शिकार बनाते थे।

केस एक
तहसीलदार बने शिकार
अप्रेल 2017 : कुछ दिनों पहले तबादला होकर जा चुके मलसीसर तहसीलदार जीतू सिंह मीणा का राजगढ़ के इंडस्ट्रीयल एरिया स्थित एसबीबीजे में खाता था। एक दिन एक व्यक्ति ने एसबीबीजे शाखा का एसबीआई में विलय होने की बात कहते हुए एडीएम कार्ड के नम्बर ले लिए। कार्ड के नम्बर लेने के कुछ देर बाद ठग ने दो बार खाते से 47 हजार 187 की खरीददारी कर डाली।

केस दो
22 अगस्त 2016: देलसर के अनिल कुमार ने बताया कि उसके पिता के पास एक युवक का फोन आया। उसने स्वयं को बैंक का अधिकारी बताते हुए उसके पिता से ओटीपी नम्बर पूछ लिए। बाद में खाते से 49 हजार रुपए की ऑनलाइन शॉपिंग कर ली।

ये रखे सावधानियां
- कार्ड को सीवीसी नम्बर किसी नहीं बताएं।
- कार्ड स्वयं करें, दूसरे को नहीं दें।
- कार्ड का रंग ध्यान रखें, इससे बदले जाने पर तुरंत पता चल सकेगा।
- क्रेडिट व डेबीट कार्ड की जानकारी किसी को नहीं देनी चाहिए।
- ईमल पर आने वाले संदेशों को क्लिक करने से बचना चाहिए।
- एटीएम से रुपए निकलवाते समय किसी का सहयोग नहीं लें।
- भुगतान के वक्त एटीएम का नम्बर छिपाकर दर्ज करना चाहिए।

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