
विश्व पर्यावरण दिवस: इस शख्स ने बारह साल में उजाड़ जंगल का किया ऐसा कायाकल्प... कि हरियाली में बदल गई तस्वीर
झुंझुनूं. अगर कुछ कर गुजरने की ललक हो तो फिर कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है शहर में रहने वाले झाबरमल पुजारी ने। अपनी मेहनत एवं लगन के बल पर उन्होंने कभी उजाड़ जंगल से दिखने वाले बिबानी मुक्तिधाम को आज हरा भरा बना दिया है। मात्र बारह साल में इस जगह का ऐसा कायाकल्प किया कि वहां पर अब आने वाले को चारों ओर हरियाली से सुकून मिलता है।
किसी समय में शहर का बिबानी मुक्तिधाम में सब तरफ जंगल सा दिखाई पड़ता था। वहां पर काटेदार झाडिय़ां एवं जंगली पेड़ पौधे के अलावा कुछ भी नहीं था। अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों को भी आवाजाही में परेशानी होती थी। सहकारी बैंक के से वर्ष 1998 में सेवानिवृत्त हुए झाबरमल पुजारी ने एक जून 2006 को स्वप्रेरणा से इस मुक्तिधाम की तस्वीर बदलने की मन में ठान इस पुनित कार्य में कूद गए। पहले तो उन्होंने कुछ हिस्से में पौधरोपण किया। बाद में उनकी सार संभाल भी की। समय के साथ-साथ पेड़ पौधों से उनका लगाव एवं जुड़ाव कुछ इस तरह से बढ़ा कि उन्होंने इसे अपने जीवन का अंग ही बना लिया।
अब तक लगा चुके है 2000 पेड़
पुजारी स्वयं ही पिछले 12 साल में विभिन्न संगठनों के सहयोग से यहां पर करीब दो हजार पेड़ लगा चुके हे। इसमें नीम, शीशम, बड़, पिपल के अलावा जामून, आम,, चीकू सहित कई फलदार पेड़ भी लगा चुके है।
स्वयं ही लगी ललक
पुजारी बताते है कि वे पिछले बीस साल से इस मुक्तिधाम पर आ रहे है। इसे विकसित करने की स्वयं को ही ललक गली। शुरू में तो कुछ पौधे लगाए लेकिन बाद में पर्यावरण के प्रति उनका ऐसा प्रेम जागा कि उन्होंने इसे अपने जीवन का हिस्सा बना लिया।बाद में तत्कालीन आयुक्त राजेन्द्रजोशी ने भी उनकी इस मुहिम को आगे बढ़ाया और मुक्तिधाम पर ट्रेक, सडक़ एवं पार्क के विकास में पूरा सहयोग दिया। हाल ही में नगर परिषद ने भी इस मुक्तिधाम के लिए करीब दस लाख रुपए का बजट दिया है। पार्षद प्रदीप डुलगच ने बताया कि इस जगह के विकास के लिए अगर और अधिक धन की जरूरत होगी तो वे परिषद से उस राशि को भी दिलाने का प्रयास करेंगे।
किसी रमणीय स्थल से नहीं लगता कम
बिबानी मुक्तिधाम में जहां पर पहले लोगों को आवाजाही में पेरशानी होती थी वह अब किसी पिकनिक स्पॉट से कम नहीं लगता है। यहां पर सुबह और शाम का नजारा देखने को बनता है। सुबह और शाम लोग वॉकिंग के लिए आते है तो बच्चे यहां बने पार्क में अटखेलियां करते हुए नजर आते हे। पार्क में झूले चकरी का भी बच्चे खूब आनन्द लेते है।
रोज छह घंटे देते है
करीब बीस साल पहले सेवानिवृत हुए पुजारी आज भी इस मुक्तिधाम में पेड़-पौधों की सार संभाल के लिए करीब छह से आठ घंटे का समय देते है। सुबह पांच छह बजे से आकर करीब नौ बजे तक पेड़ पौधों को पानी देना और साफ सफााई के अलावा वहां आने वाले पक्षियों का दाना पानी डालना भी अब इनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। वहीं शाम को भी करीब दो घंटे वे मुक्तिधाम पर आकर अपने इसी काम को पिछले 12 साल से अंजाम दे रहे है।
Published on:
05 Jun 2018 01:45 pm
