
युवक-युवती के लिए पंचायत ने जारी किया ऐसा तुगलकी फरमान, सुनने वाले भी चौंके
झुंझुनूं. विशिष्ठ न्यायाधीश,अनु.जाति,जनजाति (अत्याचार निवारण) प्रकरण झुंझुनूं की न्यायाधीश नीरजा दाधीच ने एक युवक युवती को जूतों की माला पहनाकर उनके चहरे पर कालिख पोतने, दोनों के सिर के बाल काट कर पैदल गांव में घुमाने तथा लज्जा भंग कर दोनों को अपमानित करने के मामले में आठ जनों को एक-एक वर्ष के कारावास तथा तीन को तीन-तीन वर्ष की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आठों आरोपियों को इस निर्णय के विरूद्ध अपील करने के लिए एक माह का समय देते हुए तीन वर्ष से अधिक की सजा नहीं देने के कारण जमानत पर भी छोड़ा है।
मामले के अनुसार 26 अगस्त 2009 को सुभाष ने पुलिस थाना पिलानी पर मामला दर्ज करवाया कि वह तथा अनु.जाति की एक शादी-शुदा महिला से प्रेम-प्रसंग था। दोनों अपनी मर्जी से गांव से बाहर घूमने गए तो घर वालों ने उन्हे पकड़कर पिलानी पुलिस समक्ष पेश किया। जहां दोनों ने एक साथ रहने की बात कहने पर पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया।
मामले को लेकर गांव में पंचायत बुलाई। जिसमेें दोनों के सिर के बाल काटकर काला मुंह करने के बाद जूतों की माला पहनाई व कपड़े फाड़कर गांव में घुमाया गया। सूचना पर पुलिस के आने पर भगदड़ मच गई। फरमान सुनाने वालों में जुगलाल, श्याम ङ्क्षसह, जय दयाल, कृष्ण भार्गव, कृष्ण मेघवाल, हवा ङ्क्षसह, राजेन्द्र, निर्मला देवी, विनोद कुमार आदि थे।
मामले में पुलिस ने जांच के बाद हवा सिंह पुत्र गीगराज,कृष्ण कुमार पुत्र जुगलाल,राजेन्द्र पुत्र दयाचन्द,विनोद कुमार पुत्र मानाराम,निर्मला देवी पत्नी राणजीत जाति मेघवाल निवासी डूलानिया तथा श्याम ङ्क्षसह पुत्र भंवर ङ्क्षसह राजपूत,जयदयाल पुत्र सांवलराम जाट,जुगलाल पुत्र आदराम जाट व कृष्ण पुत्र प्रेमचन्द भार्गव निवासीगण डूलानिया नौ जनों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश कर दिया। आरोपी श्याम ङ्क्षसह की चालान के बाद मृत्यु हो गयी थी। विशेष लोक अभियोजक नंदकिशोर शर्मा ने इस्तगासा पक्ष की तरफ से आठ गवाहान के बयान करवाए।
न्यायाधीश ने पत्रावली पर आई साक्ष्य का अवलोकन कर अपने निर्णय में लिखा की समाज के मौजीज व्यक्ति समाज में रहने वाले व्यक्तियों के हितों की सुरक्षा के लिए होते हंै ना कि उन्हें प्रताडि़त करने के लिए तथा आज भी हमारे समाज में इस प्रकार की कुरीतियां व्याप्त हैं। आठों आरोपियों को एक स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से हमला करने व दोनों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के मामले में प्रत्येक को एक-एक वर्ष साधारण कारावास व प्रत्येक पर को अर्थदण्ड से दण्डित किया।
इसके अलावा गैर अनुसूचित जाति के तीन आरोपी कृष्ण पुत्र प्रेमचन्द, जयदयाल पुत्र सांवल राम तथा जुगलाल पुत्र आदराम को अनु.जाति,जन.जाति अधिनियम में और दोषी मानते हुए अलग से तीन-तीन वर्ष के साधारण कारावास व अर्थ दण्ड से और दण्डित करते हुए आदेश दिया की सभी सजा साथ-साथ चलेगी।
Published on:
24 Jan 2019 11:22 am
