5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

प्रधानमंत्री मोदी को भी करनी पड़ी झुंझुनूं की इस काम के लिए तारीफ

झुंझुनूं. कभी बेटियों का कोख में कत्ल कर देने में शुमार झुंझुनूं अब बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ में अभिनव पहल कर रहा है।
2 min read
Google source verification
jhunjhunu girl save news

प्रधानमंत्री मोदी को भी करनी पड़ी झुंझुनूं की इस काम के लिए तारीफ

मनीष मिश्रा.
झुंझुनूं. कभी बेटियों का कोख में कत्ल कर देने में शुमार झुंझुनूं अब बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ में अभिनव पहल कर रहा है। एक वक्त था जब लड़के-लड़कियों के अनुपात में काफी अंतर था। ऐसे में लिंगानुपात की डांवाडोल स्थिति चिंताजनक बनी हुई थी।

यही नहीं झुंझुनूं जिला बेटियों का जन्म से ही पहले कत्ल करने में बतौर मंडी विकसित होने लगा। परंतु धीरे-धीरे आमजन बेटे-बेटियों के बीच के अंतर को पाटने के लिए बदलती सोच और प्रशासन के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के बेहतर प्रयासों की बदलौत लिंगानुपात में सुधार करते हुए बेटी बचाने और बेटी को पढ़ाने में झुंझुनूं ने देश में अपनी पहचान बनाने में कामयाबी हासिल की। पेश है एक रिपोट.....र्

इस चिंताजनक पहलू से यूं उभरा झुंझुनूं और बना लिया रिकॉर्ड
वर्ष 2011-12 की बात करें तो जिले में एक हजार लड़कों पर लड़कियों की जन्म दर केवल 857 थी। जिला स्तर पर 21 दिसम्बर 2014 को जिला स्वर्ण जयंती स्टेडियम में दो लाख 35 हजार लोगों ने बेटी बचाने की शपथ ली, जो कि लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। मुखबिर योजना के तहत सटीक सूचना देने पर अभी तक 21 लोगों को पुरस्कृत किया जा चुका है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिलेभर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया गया।

जिला प्रशासन, स्वास्थ्य व महिला बाल विकास विभाग के सामूहिक प्रयासों का नतीजा रहा कि वर्ष 2017-18 में प्रति हजार पर जन्म लेने वाली बेटियों की संख्या 952 पर पहुंच गई। सकारात्मक प्रयासों के परिणाम सामने आए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी झुंझुनूं आगमन के दौरान मंच से जिले के प्रयासों की प्रशंसा की।


कातिलों को पकड़वाने में निभाई अहम भूमिका

जानकारी के मुताबिक प्रदेशभर में अब तक हुए करीब 141 डिकॉय आपरेशनों में भू्रण ***** जांच के आरोपितों को बेनकाब करने में झुंझुनूं जिले की बेटियों ने अहम् भूमिका निभाई। स्वास्थ्य विभाग के जिला आइइसी समन्वयक महेश कड़वासरा ने बताया कि डिकॉय ऑपरेशनों में जिले की 60 महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हुए इस घृणित कार्य में लगे लोगों के चेहरे को बेनकाब किया है।

जिले में 2016 से लेकर अबतक स्वास्थ्य व महिला बाल विकास विभाग की ओर से अबतक 13 डिकॉय ऑपरेशन किए जा चुके हैं। गत वर्ष टीमों ने कार्रवाई करते हुए भू्रण ***** जांच से जुड़े दो बड़े गिरोहों के सदस्यों को पकडऩे में सफलता हासिल की।
यूं बढ़ती गईजन्मदर की स्थिति

वर्ष बालक बालिकाएं लिंगानुपात (प्रति एक हजार)
2011-12 17412 14939 857
2012-13 16616 14441 869
2013-14 17895 16189 904
2014-15 16863 15071 893
2015-16 15912 14373 903
2016-17 15537 14750 949
2017-18 13349 12714 952

इनका कहना है...
सभी के सामूहिक प्रयासों के कारण जिले में लिंगानुपात की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। लोगों की बेटियों को लेकर सोच बदलने लगी है। इसमें सुधार के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
दिनेश कुमार, जिला पीसीपीएनडीटी समन्वयक (झुंझुनूं)

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ में जिला देश में प्रथम स्थान पर है। यह सभी विभागों के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है। इसमें पूर्व जिला कलक्टर का विशेष योगदान रहा, जिसके कारण यह संभव हो सका।
विप्लव न्यौला, सहायक निदेशक महिला व बाल विकास विभाग (झुंझुनूं)

बड़ी खबरें

View All

झुंझुनू

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग