
नवलगढ़ में मरीजों को इसलिए जाना पड़ रहा है निजी क्लिनिकों में
नवलगढ़. उपखण्ड मुख्यालय के सबसे बड़े राजकीय सामान्य चिकित्सालय में सोनोलोजिस्ट तो लगा दिया गया है लेकिन सोनोग्राफी मशीन नहीं है। ऐसे में अस्पताल में रोगियों को सोनोग्राफी की सुविधा नहीं मिल पा रही है। रोगियों को मजबूरी में पहले की तरह निजी क्लिनिकों पर सोनोग्राफी की जांच करवानी पड़ रही है। जानकारी के अनुसार चिकित्सालय में सोनोग्राफी की सुविधा के लिए सोनोलोजिस्ट पवन भार्गव को लगाया गया है।
उन्होंने करीब तीन दिन पूर्वअस्पताल में अपना कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है। लेकिन अब मामला सोनोग्राफी मशीन पर अटक गया है। अस्पताल में सोनोग्राफी की मशीन नहीं है। इसलिए रोगियों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है।
अस्पताल में सोनोग्राफी नहीं होने के कारण इसकी जांच करवाना खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए भारी पड़ रहा है। उनको मजबूरी में निजी क्लिनिकों पर सोनोग्राफी की जांच करवानी पड़ रही है। इसके चलते उन्हें आर्थिक रूप से चपत लग रही है। चिकित्सकों की मानें तो अस्पताल में गर्भवती महिलाओं समेत अन्य गंभीर किस्म के रोगियों को प्रतिदिन करीब ७ से आठ सोनोग्राफी की जांच लिखी जा रही रही है।
अब एनस्थेटिक है तो सर्जन नहीं
अस्पताल में रोगियों के विभिन्न तरह के ऑपरेशन भी नहीं किए जा रहे हैं। कारण अस्पताल में सर्जन चिकित्सक का पद पिछले कईवर्षों से रिक्त पड़ा हुआ है। अस्पताल में कईवर्षों बाद एनस्थेटिक चिकित्सक का पद भरा तो वर्तमान में सर्जन नहीं है। इसकी सुविधा भी रोगियों को नहीं मिल पा रही है।
महिला रोग विशेषज्ञ का पद भी रिक्त
अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ का पद भी पिछले काफी समय से रिक्त पड़ा हुआ है। ऐसे में महिला रोगी संकोचवश उपचार के लिए राजकीय अस्पताल के बजाय निजी अस्पतालों में जा रही है। इसका भी खामियाजा महिलाओं को उठाना पड़ रहा है।
इनका कहना है
अस्पताल में सोनोलोजिस्ट के पद पर पवन भार्गव को लगाया गया है। लेकिन सोनोग्राफी मशीन नहीं है। ऐसे में सोनोग्राफी की जांच शुरू नहीं हो पाईहै। इसको लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया हुआ है।
डॉ. नवल सैनी, प्रभारी, राजकीय सामान्य अस्पताल।
Updated on:
19 Oct 2018 10:00 pm
Published on:
19 Oct 2018 10:00 pm
