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इसलिए मुफलीसी की जिंदगी जीने को मजबूर परिवार

उदयपुरवाटी. उपखंड क्षेत्र के दुडिय़ा गांव का एक परिवार मुफलीसी की जिंदगी जी रहा है। परिवार के मुखिया पति-पत्नी लंबे समय से टीबी से पीडि़त हैं। बीमारी से पीडि़त होने के साथ-साथ आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते इनके बच्चों को भी पढ़ाईछोडऩी पड़ी। गांव के महावीर पुत्र शिवचंद मेघवाल ने अपनी पीड़ा बयां की कि 8 साल से वह खुद व बीते 3 साल से उसकी पत्नी अनिता इस रोग से ग्रस्त है।
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Udaypurwati News

इसलिए मुफलीसी की जिंदगी जीने को मजबूर परिवार

मनोज टांक

उदयपुरवाटी. उपखंड क्षेत्र के दुडिय़ा गांव का एक परिवार मुफलीसी की जिंदगी जी रहा है। परिवार के मुखिया पति-पत्नी लंबे समय से टीबी से पीडि़त हैं। बीमारी से पीडि़त होने के साथ-साथ आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते इनके बच्चों को भी पढ़ाईछोडऩी पड़ी। गांव के महावीर पुत्र शिवचंद मेघवाल ने अपनी पीड़ा बयां की कि 8 साल से वह खुद व बीते 3 साल से उसकी पत्नी अनिता इस रोग से ग्रस्त है।

बीमारी के चलते आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। दो जून की रोटी के लिए बड़े बेटे रविकांत (16 ) की पढ़ाई भी बीच में ही छूट गई है। नाबालिग होने के बावजूद वह मजदूरी करके परिवार का जैसे-तैसे पेट पाल रहा है।

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पहले इलाज अब सीएम का बधाई संदेश मिला
बुहाना. अपने जिगर के टुकडे के दिल में छेद की बीमारी हो, लाखों रूपए इलाज खर्च हो, इलाज के अभाव में उसे तडफता देखना एक मां-बाप के लिये सबसे दुखद स्थिति होती है। ऐसे में सारा इलाज बिना एक किसी पैसे के हो कर बच्चा स्वस्थ हो जाये तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं होता। ऐसा ही कुछ हुआ बुहाना तहसील के कार्तिक, वंषिका, पीयुष और आयषा के साथ। जिनके माता-पिता पैसे के अभाव में इलाज से हार मान के बैठ गए। लेकिन आरबीएसके उनके लिए सहारा बन के आया। पहले इन चारों का इलाज आरबीएसके द्वारा जयपुर के निजी और महंगे अस्पतालों में निशुल्क में हुआ। अब इनको मुख्यमंत्री की ओर से स्वस्थ होने पर बधाई संदेश भेंट किए गए। बुहाना ब्लॉक कार्यालय में बीसीएमओं डॉ. हरीश यादव ने यह संदेश प्रदान किए तो बच्चों के साथ उनके माता पिता के चेहरे भी खुशी से खिल उठें। इस अवसर पर आरबीएसके टीम के डॉ. प्रमोद मान, डॉ. आकाशवीर, डॉ. मोनिका शर्मा और डॉ. सरोज भी मौजूद थे।

छोटे बेटे सुनील 14 को जैसे-तैसे करके पढ़ाया जा रहा है ,लेकिन बीमार मां और पिता की दयनीय स्थिति के चलते उसका मन भी पढ़ाई में नहीं लग रहा है। पीडि़त महावीर की मां शायरी का भी निधन भी कुछ इसी प्रकार की बीमारी के चलते कई 7-8 साल पहले हो चुका है।

इस परिवार को सरकार की तरफ से किसी भी प्रकार की सहायता नहीं मिल रही है। कच्ची झौंपड़ी में गुजर बसर कर रहे इस परिवार को बीमारी के चलते भाई ने एक कमरा फिलहाल रहने को दे रखा है।

नहीं मिल रही सरकारी मदद
मुफलीसी की जिंदगी जी रहे परिवार को सरकार की तरफ से भी कोई मदद नहीं मिल रही है। पीडि़त परिवार के पास शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। बीमार पत्नी ही पति को एक रेहड़ी पर बिठाकर खुले में शौच के लिए लेकर जाने को मजबूर है।

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