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आधे शहर में जल निकासी के समाधान के लिए भैरव नाले पर अब खर्च होंगे 21 करोड़, पहले टेंडर में आधी सुलझेगी समस्या

चुनाव आचार संहिता हटने के बाद विकास का पहला टैंडर
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Nala

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जोधपुर. शहर की आधी आबादी जिस नाले के कारण दंश भुगत रही है उसको सुधारने के लिए अब जल्द ही धरातल पर काम शुरू होगा। चुनाव आचार संहिता हटते ही जोधपुर विकास प्राधिकरण की ओर से इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। चुनाव के बाद पहला टैंडर भी इस नाले के निर्माण को लेकर लगाया गया है। करीब 21 करोड़ से अधिक राशि के इस टैंडर में आंशिक राहत तो मिलेगी लेकिन पूरी राहत के लिए अब भी कुछ इंतजार करना पड़ सकता है।

शोभावतों की ढाणी से लेकर जोजरी नदी तक बारिश के पानी को ले जाने के लिए भैरव नाले का निर्माण करवाया जा रहा है। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा और उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद जेडीए, नगर निगम व जिला प्रशासन ने इस पर जवाब पेश किए थे। जेडीए ने पूरे शहर की जल निकासी के लिए दो प्रमुख नालों के निर्माण पूरे करने की जिम्मेदारी उठाई थी। इसमें से एक भैरव नाला और दूसरा माता का थान नाला है जिसे सैन्य क्षेत्र से होकर जोजरी नदी तक मिलाना है। इसमें से भैरव नाला का काम टैंडर प्रक्रिया पूरी होते ही शुरू होगा।

जमीन अधिग्रहण है बड़ी समस्या
दोनों ही प्रमुख नालों को जोजरी नदी तक मिलाने के लिए जमीन अधिग्रहण बड़ी समस्या है। हालांकि जेडीए ने इसकी जिम्मेदारी ली है। लेकिन इसके लिए बजट जुटाना बड़ी समस्या है। दोनों ही नालों की जमीन अधिग्रहण पर करीब 40 से 50 करोड़ का खर्चा आ सकता है।

विवेक विहार से होकर निकलेगा नाला

यह नाला जेडीए की योजना विवेक विहार से होकर निकलेगा। इससे कम से कम जमीन अधिग्रहण होगा। इस योजना में अधिकांश जमीन जेडीए की है। लेकिन इसके बावजूद भी करीब 1.5 किलोमीटर क्षेत्र में नाले के लिए जमीन अधिग्रहण करना है।

इस प्रकार होगा पहले चरण में काम

- 21.75 करोड़ का कुल काम पहले चरण में होगा।
- 4.5 किलोमीटर नाले का निर्माण इस दौरान जेडीए की ओर से करवाया जाएगा।
- 2.4 किलोमीटर इसके अतिरिक्त नाले का निर्माण दूसरे चरण में होगा।
- दूसरे चरण में कुछ हिस्सा नगर निगम के अधीन आता है।
- 2.4 किलोमीटर क्षेत्र में ही नाले के निर्माण के लिए कुछ जमीन भी अधिग्रहण करनी होगी, जो प्रक्रिया बाद में शुरू की जाएगी।

पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 45 करोड़ से अधिक

भैरव नाले के दोनों चरणों की मिलाकर लागत करीब 45 करोड़ है। जेडीए के अधिशासी अभियंता राजेश बोड़ा ने बताया कि लेकिन फिलहाल पहले चरण में 21 करोड़ से अधिक राशि खर्च की जाएगी। इस काम को 2 साल की अवधि में पूरा करना होगा।