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एयरफोर्स स्टेशन निर्माण से विस्थापित परिवारों को दो जमीन

फलोदी के नजदीक एयरफोर्स स्टेशन का मामला  
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एयरफोर्स स्टेशन निर्माण से विस्थापित परिवारों को दो जमीन

जोधपुर.

राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नन्द्राजोग और डॉ. जस्टिस पुष्पेन्द्रसिंह भाटी की खडपीठ ने फलौदी के पास कुडल गांव में करीब चालीस वर्ष पूर्व एयरफोर्स स्टेशन निर्माण के लिए भूमि आवाप्त करने के बाद विस्थापित सभी परिवारों को नई आबादी भूमि चिन्हित कर भूखण्ड उपलब्ध कराने और उस पर निर्माण के लिए तीन माह का समय देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि तब अप्रार्थी सरकार व प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जाए।

खंडपीठ ने यह आदेश वेनीदत्त व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका (834/2017) और याचिका में दायर विविध आवेदन (32/ 2018) का निस्तारण करते हुए दिए। याचिका में कहा गया था कि 20 दिसम्बर 2016 को जनहित याचिका में जारी आदेश में कुंडल गांव के खसरा नं 523 में 1564 .12 बीघा व खसरा संख्या 476 में 313.13 बीघा गैर मुमकिन जमीन पर अतिक्रमण कर किए निर्माण को हटाया जाए।

लेकिन प्रशासन की ओर से आज तक कुछ नहीं किया गया। इसके विपरीत सुनवाई के दौरान एक आवेदन पेश कर कहा गया कि फलौदी में एयरफोर्स स्टेशन के निर्माण के समय भूमि आवाप्ति के बाद विस्थापितों ने चालीस वर्ष पूर्व इस स्थान पर 40 वर्ष पूर्व शरण ली। सरकार ने बाद में वहां स्कू ल, पानी की टंकी व सभाभवन आदि का निर्माण करा दिया।

इसपर खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि 40 वर्ष तक यह सब होता रहा तब वे कहां थे। ये सभी लोग बीपीएल कार्डधारी हैं और इनके पास 30 साल पुराने बिजली के बिल तक मौजूद हैं। कोर्ट ने कहा कि गैरमुमकिन आगोर से निर्माण हटाना जरूरी है इसलिए मामले में संतुलन बनाते हुए इस तरह का आदेश जारी किया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से मनोज बोहरा, विकास रंगा ने, आवेदनकर्ता की ओर से हर्षित भूरानी ने और राज्य सरकार की ओर से एएजी पीआर सिंह जोधा ने पैरवी की।