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आसाराम ने अंतरिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

एम्स से मेडिकल रिपोर्ट मांगी
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आसाराम ने अंतरिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

आसाराम ने अंतरिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

जोधपुर। कोविड-19 सहित अन्य बीमारियों के इलाज के लिए नाबालिग से बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम बापू ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आसाराम के अंतरिम जमानत आवेदन पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), जोधपुर से मेडिकल रिपोर्ट तलब की है।
न्यायाधीश संदीप मेहता तथा न्यायाधीश देवेन्द्र कच्छवाहा की खंडपीठ में आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जेएस चौधरी ने पैरवी करते हुए कहा कि कोविड-19 के उपचार सहित अन्य बीमारियों के इलाज के लिए याची जोधपुर से बाहर उच्च चिकित्सा केंद्र में इलाज करवाना चाहता है। सजा स्थगन का प्रार्थना पत्र पेश करते हुए उन्होंने अंतरिम जमानत की मांग की, जिस पर खंडपीठ ने लोक अभियोजक अनिल जोशी को अगली सुनवाई पर याची की मेडिकल रिपोर्ट पेश करने को कहा। अगली सुनवाई 13 मई को होगी। जोधपुर सेंट्रल जेल में तबीयत खराब होने पर आसाराम बापू को बुधवार देर रात महात्मा गांधी अस्पताल लाया गया था, जहां जांच में वे कोरोना वायरस संक्रमित पाए गए। फेफड़ों में संक्रमण को देखते हुए उन्हें बाद में एम्स में रेफर किया गया, जहां वर्तमान में उनका उपचार चल रहा है। गौरतलब है कि स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो एक्ट) ने ‪25 अप्रैल, 2018 को आसाराम को मृत्यु आने तक आजीवन कारावास की सजा तथा उसके दो सहयोगियों शरद व शिल्पी को बीस-बीस साल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट से दोनों सहयोगियों की सजा स्थगित हो चुकी है, जिसके बाद दोनों जमानत पर रिहा भी हो गए। आसाराम पर आरोप था कि उसने जोधपुर के निकट मनाई स्थित आश्रम में अपने गुरुकुल में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा का अगस्त, 2013 में यौन उत्पीड़न किया था। लंबी ट्रायल के बाद स्पेशल कोर्ट ने आसाराम को दोषी पाया था। सजा के खिलाफ आसाराम ने जुलाई, 2018 में 44 पेज की अपील पेश की थी। शरद और शिल्पी ने भी अपनी सजा के खिलाफ अपील पेश कर रखी है।