
Beawar Cylinder Blast
जोधपुर। कहावत है कि जनम-मरण-परण को कभी टाला नहीं जा सकता। यह कहावत ब्यावर में तीन सिलेण्डर फटने के मामले में सटीक चरितार्थ हुई। सिलेण्डर फटने व आगजनी में मरने वालों में अशोक नगर की दुल्हन रितु के ससुराल पक्ष के लोग शामिल थे। शनिवार को गमगीन माहौल में रितु ने हेमंत से सात फेरे लिए। रितु की विदाई के बाद रात में उसकी चचेरी बहन सुप्रिया के फेरे हुए। हालांकि ये भी सिर्फ औपचारिकता ही थे।
मौत के मंजर के बीच दुल्हन रितु को ब्यावर स्थित घर की बजाय यहां सूरसागर स्थित बुआ के घर ले जाया गया, जहां कुछ घंटे रुकने के बाद दुल्हन पीहर लौट आई। दूल्हा बगैर दुल्हन ब्यावर रवाना हो गया। शादी समारोह वाला घर छोडक़र रितु के पिता लक्ष्मण पीपाड़ शहर को निकल गए।
पत्रिका पढक़र पता चला, इतना बड़ा हादसा...
दुल्हन रितु को यह तो पता था कि ससुराल में अनहोनी हुई है, लेकिन इतना भीषण हादसे का आभास नहीं था। रविवार सुबह राजस्थान पत्रिका में ब्यावर में सिलेंडर विस्फोट की खबर पढ़ी तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई।
दस शवों को देख पथरा गया पीपाड़शहर
ब्यावर दु:खांतिका में शहरी क्षेत्र के दर्जी छीपा समाज के एक ही परिवार के दस मृतकों की शवयात्रा को देख समूचा पीपाड़सिटी जैसे पथरा गया।
रविवार शाम गमगीन माहौल में अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि के साथ इन सभी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इससे पूर्व शाम 6 बजे दस परिजनों के शव विशेष वाहनों में ब्यावर से पीपाड़सिटी लाए गए। दिनभर शवों के इंतजार में पूरा कस्बा मानो मरघट के सन्नाटे में डूबा रहा।
मेडिकल स्टोर को छोड़ कस्बेवासियों ने स्वेच्छा से पूरे दिन अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। शवयात्रा में कस्बेवासी ही नहीं, आस-पास के गांवों से भी हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े।
गुरुवार को हंसी-खुशी ब्यावर में भांजे के विवाह समारोह में मायरा भरने गये इस परिवार को सपने में भी कल्पना नहीं थी कि परिवार के दस सदस्य फिर जीवित नहीं लौटेंगे। ब्यावर में शुक्रवार को गैस सिलेण्डर फटने से धराशायी हुए तिमंजिला कुमावत भवन में दबने से मृतकों की संख्या कुल 19 हो गई, जिनमें सर्वाधिक दस पीपाड़सिटी के एक ही परिवार के लोग हैं।
Published on:
19 Feb 2018 08:34 am
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