
फाइल फोटो- पत्रिका
जोधपुर। जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट उद्योग को एक्सपोर्ट (निर्यात) के साथ अब घरेलू बाजार में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हैण्डीक्राफ्ट के हर प्रोडक्ट पर बीआईएस (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स) प्रमाणन की अनिवार्यता (30 मार्च 2027 से प्रस्तावित) ने विशेष रूप से छोटे और मध्यम हस्तशिल्प उद्योगों के अस्तित्व को संकट में डाल दिया है।
इस अनिवार्यता के तहत हर प्रोडक्ट के लिए बीआईएस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा, जिसमें बीआईएस आवेदन शुल्क, वार्षिक शुल्क, सैंपल परीक्षण और कंसल्टेंसी मिलाकर शुरुआती लागत ही लगभग 3.60 लाख रुपए तक होगी।
इस नियम की अनिवार्यता से छोटे एक्सपोर्टर के लिए बीआईएस प्रमाणन प्राप्त करना लगभग असंभव हो गया है। इसके अलावा प्रत्येक उत्पाद के लिए अलग-अलग जांच अनिवार्य की गई है। जैसे साधारण कुर्सी की जांच लगभग 3.20 लाख रुपए। इसी तरह टेबल की जांच लगभग 2.25 लाख रुपए। ऐसे में यदि किसी इकाई में 10-15 प्रकार के उत्पाद हैं, तो यह लागत लाखों तक पहुंच सकती है, जो छोटे उद्योगों के लिए अव्यवहारिक होगी।
नए नियम का सीधा असर यह होगा कि जोधपुर की हजारों इकाइयां बंद हो जाएंगी। छोटे कारीगर, बढ़ई और मजदूर इस महंगी प्रक्रिया को वहन नहीं कर सकेंगे। ऐसे में वे बाजार से बाहर होकर बेरोजगार हो जाएंगे।
इन सभी परिस्थितियों ने जोधपुर के हस्तशिल्प उद्योग को 'सर्वाइवल मोड' में ला दिया है।
यदि सरकार ने समय रहते इस विषय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो जोधपुर का हस्तशिल्प उद्योग, जो लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है, धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगा।
बीआईएस प्रमाणन को छोटे उद्योगों के लिए सरल और सस्ता किया जाए। प्रोडक्ट जांच शुल्क में कमी या सब्सिडी दी जाएगी, तो यह उद्योग जिंदा रहेगा।
इस जांच में समूह प्रमाणन की व्यवस्था लागू की जाए। इससे इस उद्योग से जुड़े लोगों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
Updated on:
07 May 2026 07:54 pm
Published on:
07 May 2026 07:54 pm
