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Cyber fraud: फर्जी ट्रांसपोर्टर बन कांग्रेस नेता की फर्म को लगाई 8.8 लाख की चपत

ठग गिरोह ने रुपए ऐंठने के लिए धोखाधड़ी का नया तरीका ढूंढा है। शिकारगढ़ में कांग्रेस नेता की कम्पनी से पाइप परिवहन करने का झांसा देकर गिरोह ने बतौर अग्रिम भाड़े के 8.80 लाख रुपए ऐंठ लिए।

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जोधपुर। ठग गिरोह ने रुपए ऐंठने के लिए धोखाधड़ी का नया तरीका ढूंढा है। शिकारगढ़ में कांग्रेस नेता की कम्पनी से पाइप परिवहन करने का झांसा देकर गिरोह ने बतौर अग्रिम भाड़े के 8.80 लाख रुपए ऐंठ लिए। भाड़ा न मिलने पर मूल ट्रांसपोर्टर ने अजमेर में ट्रेलर रोककर कम्पनी को सूचित किया तो ठगी का पता लगा। मोबाइल नम्बर, ईएमईआइ नम्बर व बैंक खाते के आधार पर एयरपोर्ट थाना पुलिस ने जांच कर यूपी के फर्रूखाबाद जिले में रूलापुर निवासी आशुतोष उर्फ कन्हैयाल पुत्र सुधाकर त्रिवेदी और पवन कुमार पुत्र शेरसिंह ठाकुर को गिरफ्तार किया गया। जबकि सचिन उर्फ पवन सादिकपुर पकड़ में नहीं आया है। पुलिस उपायुक्त (पूर्व) डॉ. अमृता दुहन ने बताया कि डारा थर्मोप्लास्ट प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी के मैनेजर सुमेश गुप्ता ने फर्म से 8.80 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। कार्रवाई में साइबर सैल के एएसआइ राकेश व कांस्टेबल रमेश कुमार चौधरी व सुरेश कुमार की मुख्य भूमिका रही।

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55 हजार भाड़ा तय कर 17 ट्रेलर भिजवाए
थानाधिकारी शैफाली सांखला ने बताया कि गिरोह ने फर्जी ट्रांसपोर्ट कम्पनी बनाकर उसका बूस्ट पेज जस्ट डायल वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कर अपलोड कर रखा है। डारा थर्मोप्लास्ट कंपनी में एडीपीई पाइप बनाए जाते हैं। जिनके ट्रांसपोर्टेशन के लिए 40 फुट ट्रेलर की जरूरत थी। मैनेजर ने गूगल पर जस्ट डायल वेबसाइट पर सर्च किया। मैनेजर के मोबाइल नम्बर व ई-मेल आइडी ठगों की ट्रांसपोर्ट कम्पनी के सचिन तक पहुंचे। उसने आरोपी आशुतोष व पवन को दे दिए। ट्रांसपोर्टर मुकेश मांझी बन मैनेजर से बात की थी। मैनेजर ने अग्रिम बातचीत के लिए कम्पनी के कर्मचारी पप्पूराम बिश्नोई को मोबाइल नम्बर दे दिए। आरोपी से बात कर एमपी की सागर साइट के लिए प्रति ट्रेलर 55 हजार रुपए भाड़ा तय किया गया। जो उन्होंने अग्रिम देने की शर्त रखी थी। 29 सितम्बर को चार ट्रेलर भेजे गए। बतौर अग्रिम 2.20 लाख रुपए खाते में जमा करवा दिए गए थे। 2-3 दिन में 17 ट्रेलर लगा दिए थे। जिसका भाड़ा अग्रिम दे दिया गया था।

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5 मोबाइल में 70 सिम, देश में 2 दर्जन से ठगी
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पांच मोबाइल काम लिए थे। इनमें 70 सिमें डालकर ठगी के लिए लोगों से सम्पर्क किया था। आरोपियों ने देशभर में 2 दर्जन से अधिक लोगों से ठगी कर लाखों रुपए ऐंठे हैं।

मूल ट्रांसपोर्टर ने खोली पोल
5 अक्टूबर को सनराइज रोडलाइंस के मालिक रामेश्वर प्रसाद सुन्डा कम्पनी के शिकारगढ़ ऑफिस पहुंचे और पाइप से भरे ट्रेलर अजमेर में रोकने की जानकारी दी। कारण पूछने पर उसने किराया न मिलने के बारे में बताया। कम्पनी ने उन्हें अग्रिम भाड़ा खाते में जमा करवाने की जानकारी दी। तब पता लगा कि यह अग्रिम किराया ट्रेलर भेजने वाली सनराइज रोडलाइंस के खाते में जमा न करवाकर ठग गिरोह ने अपने खाते में जमा करवा ली थी। अग्रिम किराए के लिए ठग फर्जी एसएमएस भेजते हैं। मूल ट्रांसपोर्टर के बैंक खाता नम्बर, नाम व आइएफएसी कोड में कांट-छांटकर अपना खाता नम्बर भेज देते हैं।