
सिर के पीछे सिर के ही आकार की गांठ पिछले 15 साल से मरीज को परेशान कर रही थी। जैसे-जैसे इस गांठ का आकार बढ़ा, मरीज की गर्दन में दर्द और हाथों में सूनापन की शिकायत भी सामने आई। मरीज को चलने में और नींद लेने में भी समस्या रहती थी। मरीज ने सर्जिकल आउटडोर में दिखाया तो एमडीएम अस्पताल के सह आचार्य एवं यूनिट प्रभारी डॉ. दिनेश दत्त शर्मा ने इसके ऑपरेशन की ठानी। डॉक्टर्स की टीम ने ये जटिल ऑपरेशन किया।
विशेष प्रकार का ट्यूमर था
डॉ. शर्मा ने बताया कि यह एक विशेष प्रकार का ट्यमूमर था, जिसे मिजेन्काईमल ट्यमूमर कहा जाता है। यह ट्यूमर धीरे-धीरे इतना बड़ा हो गया था कि इसने स्कल (खोपड़ी) की आउटर टेबल को भी नष्ट करना शुरू कर दिया था और इनर टेबल तक पहुंच चुका था। दबाव की वजह से इस गांठ ने ओसिपिटल बोन की को भी 4 सेंटीमीटर तक नष्ट कर दिया था। इस प्रकार का ऑपरेशन काफी चैलेंजिंग था, क्योंकि ब्लड सप्लाई अत्यधिक होती है। साथ ही इस प्रकार की गांठ दिमाग से भी चिपक जाती है, जिससे अलग करना काफी मुश्किल होता है, लेकिन डॉक्टर्स की टीम ने इसे सफलतापूर्वक किया।
इस टीम ने किया ऑपरेशन
ऑपरेशन करने वाली टीम में यूनिट प्रभारी डॉ. दिनेश दत्त शर्मा के साथ डॉ. अंशुल, डॉ. राकेश एवं एनेस्थसिया से डॉ. गीता सिंगारिया के साथ डॉ. गायत्री तंवर, डॉ. दिनेश, डॉ. आभास शामिल थे। नर्सिंग टीम में वरुण विकास के साथ रेखा पंवार, सुमेर सिंह राजपुरोहित एवं वीरेंद्र पुरी का योगदान रहा। एमडीएम अधीक्षक डॉ. नवीन किशोरिया ने बताया कि मरीज का ऑपरेशन मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत निशुल्क हुआ है।
Published on:
28 Feb 2024 04:45 pm
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