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भाई ने आखों के सामने तोड़ा था दम तो शुरू कर दी जिंदगी बचाने की मुहिम

कार्डियक अरेस्ट से कम उम्र में हो रही अचानक मौतों ने आमजन को असुरक्षा और निराशा में डाल दिया है। इनमें कई लोगों को यदि सही समय पर कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) मिल जाता तो उनकी जान बच सकती थी

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कार्डियक अरेस्ट से कम उम्र में हो रही अचानक मौतों ने आमजन को असुरक्षा और निराशा में डाल दिया है। इनमें कई लोगों को यदि सही समय पर कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) मिल जाता तो उनकी जान बच सकती थी। इसी जागरूकता को लेकर 79 वर्षीय डॉ. राजेन्द्र तातेड़ पूरे प्रदेश में घूम-घूम कर सीपीआर की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

हजारों लोगों को कर चुके जागरूक
डॉ. तातेड़ सीपीआर की ट्रेनिंग के लिए अपने पैसे से डमी लेकर जाते हैं। तातेड़ अब तक 200 से ज्यादा सेमिनार में हजारों की संख्या में लोगों को जागरूक कर चुके हैं। वे किसी प्रकार की फीस नहीं लेते। उन्होंने कहा कि लोगों को सीपीआर की जानकारी जरूरी है। वे बीएसएफ, सीआइएसएफ जैसे सुरक्षा बल, कई स्कूल-कॉलेजों में बतौर ट्रेनर जा चुके हैं।

भाई ने आंखों के सामने दम तोड़ा
30 जनवरी 2022 को जोधपुर निवासी सुशांत बाहेती की तबीयत बिगड़ी। परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां ईसीजी सामान्य आई। छोटा भाई मयूर दवाई लेने गया तो पीछे से उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन सुशांत को दूसरे अस्पताल लेकर गए, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। पता चला कि उनको कार्डियक अरेस्ट आया था व सीपीआर मिलती तो वे बच सकते थे। तभी परिवार ने बाहेती एजुकेशन ग्रुप के जरिए सेव लाइफ अभियान शुरू किया। अभियान के जरिये 135 से ज्यादा कैंप लगा चुके हैं।

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9 साल में चला रहे अभियान
डॉ. राजेन्द्र तातेड़ बताते हैं कि 21 फरवरी 2014 को उनके बड़े बेटे शैलेष तातेड़ की कार्डियक अरेस्ट से मृत्यु हो गई थी। इस हादसे के बाद पांच महीने तक वे बेसुध से रहे, पार्क में अकेले बैठे रहते थे। ये देख उनका छोटा बेटा अभिषेक चिंता करने लगा। एक दिन छोटे बेटे ने कहा कि जिस तरह उसने अपने भाई को खोया है...वैसे अब दुनिया से कोई नहीं जाना चाहिए। अभिषेक ने कहा कि अब आप लोगों को सीपीआर की ट्रेनिंग देंगे। इसके बाद अब वे पिछले 9 साल से लोगों में जागरूकता अभियान चला रहे हैं।

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