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रोचक मुकाबले में बिगड़ रही गणित, निर्णायक मतों से तय होगी किस्मत

लूनी विधानसभा क्षेत्र : चार जातियों के प्रत्याशी कर रहे वोटों का ध्रुवीकरण
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Election 2018 : Luni Assembly is Hot Seat in Jodhpur

रोचक मुकाबले में बिगड़ रही गणित, निर्णायक मतों से तय होगी किस्मत

के.आर. मुण्डियार
जोधपुर.
लूणी के रण में इस बार कांग्रेस व भाजपा दोनों के समक्ष चुनौती खड़ी हो गई है। सशक्त निर्दलीय की बजाय तीसरे मोर्चे के रूप में अन्य दलों के दो प्रत्याशियों के डटे रहने से दोनों दलों की सांसें फूल रही हैं। दोनों को अपने परम्परागत वोटों के बिखरने की चिन्ता सता रही है।

लूणी विस क्षेत्र के पिछले चुनावों की गणित के अनुसार 1952 से अब तक के 15 चुनाव में 10 बार कांग्रेस, 3 बार भाजपा और २ बार निर्दलीय ने जीत का सेहरा बांधा। गत चुनावों में कांग्रेस से दो बार पूनमचंद विश्नोई और उनके बाद 7 बार कांगे्रस से दिग्गज रामसिंह विश्नोई व एक बार उनके पुत्र मलखानसिंह ने लूणी की सीट पर कब्जा जमाया। कांग्रेस से रामसिंह विश्नोई व भाजपा से जसवंतसिंह विश्नोई यहां से जीत कर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे।

कांग्रेस ने एक बार फिर रामसिंह विश्नोई के परिवार से उनके पौत्र महेन्द्र विश्नोई पर दांव खेल परिवारवाद पर विश्वास जताया है। वहीं भाजपा ने विधायक जोगाराम पटेल को ही पुन: मैदान में उतारकर अन्य दावेदारों के सपनों को धो दिया। टिकट मिलने के बाद कांग्रेस के प्रत्याशी विश्नोई अपने दादा रामसिंह विश्नोई की विरासत को जीतने की कोशिश में हैं तो भाजपा प्रत्याशी पटेल अपनी कुर्सी बचाकर फिर विधायक बनने की जुगत में जुटे हैं।


जातिगत समीकरण के लिहाज से वोटों के धु्रवीकरण के कारण यह सीट अब तक विश्नोई व पटेल जाति के कब्जे में ही रही है। इस सीट पर तीसरे मोर्चे के रूप में कब्जा जमाने के लिए पहले भी कई बार प्रयास हुए, लेकिन यहां की जनता ने दोनों प्रमुख दलों के अलावा तीसरे दल या निर्दलीय पर भरोसा नहीं जताया। केवल दो बार 1952 में नरसिंह कच्छवाह तथा वर्ष 1962 में स्वरूपसिंह ने निर्दलीय के रूप में जरूर जीत दर्ज की थी। उसके बाद यह सीट कांग्रेस व भाजपा के पाले में ही आती रही। लेकिन इस बार चुनाव में तीसरे मोर्चे के रूप में नवगठित पार्टी आरएलपी से भंवरलाल व कांग्रेस के बागी होकर बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे पप्पूसिंह ने दोनों दलों की गणित बिगाड़ दी है।

जानकार मान रहे हैं कि ऐसे हालात में अब लूणी के रण का फैसला अन्य जातियों के निर्णायक मतों से ही तय होगा। टिकट घोषणा से पहले क्षेत्र में दलों के नेताओं की ओर से लूणी के विकास, समस्याओं आदि मुद्दों को लेकर बातें की जा रही थी, लेकिन मतदान की तिथि नजदीक आने के साथ ही मुद्दों को भुला दिया जाता है। प्रत्याशियों की ओर से भावनात्मक जुमलों, मतदाताओं के पैरों में साफा रखकर, पैर छूकर इज्जत बचाने की बातें की जा रही हंै।

वे मुद्दे जिन पर इन दिनों कोई चर्चा नहीं-

-फैक्ट्रियों के दूषित पानी से प्रदूषण की शिकार जोजरी व लूणी नदी का संरक्षण।
-लूणी क्षेत्र के हर गांव के अन्तिम छोर तक इंदिरा गांधी नहर का पानी मिले।

-झंवर में तहसील बनाई जाकर लोगों को लूणी मुख्यालय की दूरी से राहत दी जाएं।
-केरू-बेरू से लूणी उपखण्ड मुख्यालय तक रोडवेज की परिवहन सेवा शुरू कर कनेक्टिविटी बढाई जाएं।

-जेडीए को हस्तांतरित जमीनें ग्राम पंचायतों को दी जाकर विकास का हक दिया जाएं।

लूणी विस क्षेत्र प्रोफाइल
कुल मतदाता- 293990

पुरुष- 155160
महिला- 138825

नए मतदाता जोड़े गए- 53298
मतदान केन्द्र- 304, कुल प्रत्याशी -9

बीते 15 साल में विधायक रहे
2013- जोगाराम पटेल (भाजपा)

2008- मलखान विश्नोई(कांगे्रस)
2005- जोगाराम पटेल (भाजपा)

2003- रामसिंह विश्नोई(कांगे्रस)

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भाजपा प्रत्याशी - जोगाराम पटेल--
ताकत

-वर्तमान में विधायक हैं, गत बार करीब 36 हजार मतों से जीते थे।
-क्षेत्र की जनता से लगातार सम्पर्क में रहे हैं। पटेल समाज के जातिगत वोट का समर्थन।

कमजोरी

- टिकट की दौड़ में शामिल रहे दावेदार पूरे मन से साथ नहीं। भितरघात का खतरा भी बना है।

- विकास कार्यों में भेदभाव का आरोप। कुछ लोगों में असंतोष है।

कांग्रेस प्रत्याशी- महेन्द्र विश्नोई--

ताकत
- कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे पूर्व मंत्री रामसिंह विश्नोई के पौत्र हैं।

- युवाओं का समर्थन मिल रहा है।

कमजोरी
-राजनीतिक क्षेत्र में नया चेहरा। पहली बार चुनावी मैदान में।

- भितरघात का खतरा है।