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सिलिकोसिस का नहीं मिला तोड़, राजस्थान के इस शहर में सबसे ज्यादा पीड़ित, देखें आंकड़ें

silicosis disease in Rajasthan : सिलिकोसिस जैसी लाइलाज बीमारी पत्थर की खदानों में काम करने वाले लोगों का साथ नहीं छोड़ रही।

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हर्षित जोशी

Silicosis Disease in Rajasthan : सिलिकोसिस जैसी लाइलाज बीमारी पत्थर की खदानों में काम करने वाले लोगों का साथ नहीं छोड़ रही। सरकार ने पूरी तरह से ड्राई ड्रिलिंग को प्रतिबंधित कर रखा है। इसके बावजूद हर साल 1500 नए मामले सामने आ रहे हैं। इनमें राजस्थान में सबसे ज्यादा पीड़ित जोधपुर के हैं।

सिलिकोसिस फेफड़ों की एक जटिल बीमारी है, जो सिलिका के सूक्ष्म धूलकणों का सांस के साथ शरीर में जाने से होती है। सिलिका बालू, चट्टान व क्वार्ट्ज के खनिज अयस्क का प्रमुख घटक है। जो लोग सैंड ब्लास्टिंग, खनन उद्योग, विनिर्माण आदि क्षेत्र में कार्यरत हैं, उन्हें सिलिकोसिस से ग्रस्त होने का जोखिम रहता है। सिलिका के धूलकणों के कारण तरल एकत्रित होता है और फेफड़ों के ऊतकों को जख्मी कर देता है। इस बीमारी में सांस लेने की क्षमता घट जाती है। राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार के पत्थर निकाले जाते हैं। खनन के दौरान पत्थरों को तोड़ते समय या इनकी कटिंग करते समय धूल और इनके कणों से अस्थमा, टीबी और सिलिकोसिस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।

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राजस्थान में टॉप 5 शहर
- 1379 एक्टिव केस हैं वर्तमान में जोधपुर में जो सबसे ज्यादा हैं।
- 1288 मामले करौली में, जो कि दूसरे स्थान पर है।
- 1237 केस दौसा में, जो कि तीसरे स्थान पर है।
- 351 मामले धौलपुर में रजिस्टर्ड किए गए हैं।
- 215 सर्टिफाइड मामलों के साथ पाली पांचवें स्थान पर है।

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