
सरकार को अगली सुनवाई से पूर्व नीतिगत निर्णय लेने को कहा
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को देवस्थान विभाग की संपत्तियों को लेकर प्रस्तावित किराया नीति पर सकारात्मक रूप से अगली सुनवाई से पहले निर्णय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। ऐसा निर्णय लिए जाने पर उसे कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है। अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी।
मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति तथा न्यायाधीश दिनेश मेहता की खंडपीठ में स्वप्रसंज्ञान के आधार पर दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान बताया कि पूर्ववर्ती सुनवाई में दिए गए आदेश की पालना में देवस्थान सचिव ने अपना शपथ पत्र 10 दिसंबर को पेश कर दिया था, जिसमें बताया गया कि दिसंबर महीने में राज्य के विभिन्न हिस्सों में बैठकों का आयोजन कर नीति को अंतिम रूप दे दिया जाएगा और उसे जल्द ही राज्य सरकार की सक्षम स्वीकृति से लागू किया जाएगा। खंडपीठ ने शपथ पत्र को देखते हुए सुनवाई की अगली तिथि मुकर्रर की और अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिए कि नीतिगत निर्णय जल्द से जल्द या अगली सुनवाई से पहले सुनिश्चित किया जाए।
गौरतलब है कि पिछले साल 9 सितंबर को कोर्ट के ध्यान में लाया गया था कि तीन साल पहले देवस्थान विभाग के सचिव ने नीति निर्धारित करने के लिए समय मांगा था, लेकिन अब तक इस दिशा में अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। कोर्ट ने अपने आदेश में मुख्यमंत्री से यह उम्मीद जताते हुए कहा था कि हमारी चिंता अनिवार्य रूप से राजस्थान राज्य और देश के बाहर देवस्थान की अचल सम्पत्ति की सुरक्षा और संरक्षण की है। हमें विश्वास है कि एक बार यह आदेश मुख्यमंत्री के संज्ञान में आएगा तो मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा नीति के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जाएंगे। देवस्थान संपत्तियों की बदहाली को लेकर कोर्ट ने याचिका दर्ज करते हुए सुनवाई शुरू की थी, जिसमें सामने आया था कि देवस्थान विभाग के मंदिरों व अन्य संपत्तियों से जुड़ी दुकानें औने-पौने किराये पर दी गई है। ऐसे किरायेदारों ने ये संपत्तियां आगे लाखों रुपए के किराये पर दे दी हैं। इस तरह की प्रवृत्ति रोकने तथा देवस्थान संपत्तियों के रखरखाव के लिए विभाग को नई किराया नीति लागू करने की जरूरत है।
Published on:
05 Jan 2021 05:35 pm
