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किसानों पर आसमां से टूटी आफत, बेमौसम बारिश ने बरपाया कहर, बर्बाद हुई ये फसल

पश्चिमी विक्षोभ के असर से दो दिन पहले हुई बारिश ने किसानों की परेशानी की बढ़ा दी है।

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जोधपुर। पश्चिमी विक्षोभ के असर से दो दिन पहले हुई बारिश ने किसानों की परेशानी की बढ़ा दी है। इस बारिश ने मूंगफली पैदावार किसानों की कमर तोड़ दी। बारिश से मूंगफली की फसल में बड़े पैमाने पर खराबे की आशंका है। खरीफ सीजन में किसान लगातार दिक्कतों का सामना करते आ रहे है। जिले में 1.80 लाख हैक्टेयर में खरीफ की प्रमुख फसल मूंगफली की बुवाई हुई। अभी मूंगफली की खुदाई चल रही है और मूंगफली को सूखने के लिए खेतों में छोड़ी हुई है, लेकिन बेमौसम बरसात मूंगफली पर आफत बनकर बरसी और किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। किसानों की मानें तो करीब 50 फीसदी से ज्यादा मूंगफली बर्बाद हो चुकी है।

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काली पड़ने से गुणवत्ता खराब
सूखने पर मूंगफली को इकट्ठा करने के बाद जमीन में बची हुई 25-30 प्रतिशत मूंगफली की छनाई की जाती है। बैमोसम बरसात से खोद कर छोड़ी हुई मूंगफली भीगने से काली पड़ने से गुणवत्ता खराब होने के साथ- साथ मूंगफली का चारा भी खराब हो जाएगा। वहीं जमीन में बची हुई मूंगफली जमीन गीली रहने से सडक़र नष्ट हो जाएगी, इससे किसानों को मूंगफली में कुल 45 से 50 प्रतिशत नुकसान हो जाएगा।

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मूंग-मोठ, बाजरा में भी हुआ था नुकसान
खरीफ फसल की बात करें तो पहले लंबे समय तक बरसात नहीं होने के कारण सूखे की स्थिति बनी थी। इसके बाद झोला चलने से फसलों में नुकसान पहुंचा। उस समय मूंग, मोठ व बाजरा की कटाई के समय बरसात होने
से इन फसलों में नुकसान हुआ था।

नुकसान का अनुमानित आकलन
1.80 लाख हैक्टेयर में जिले में मूंगफली की बुवाई
1500 रुपए प्रति क्विंटल कम दाम मिलेंगे। खुदाई की हुई मूंगफली की गुणवत्ता खराब होने से। इससे प्रति बीघा 6000 रुपए का नुकसान।
2000 हजार रुपए प्रति बीघा के हिसाब से मूंगफली के चारे का नुकसान।
6000 हजार रुपए प्रति बीघा जमीन गीली होने से चुगाई की मूंगफली सड़ने से होने वाला नुकसान।
1575 करोड़ तक का कुल नुकसान होने की आशंका

फसल बीमा क्लेम दर्ज का विकल्प
कटी फसलों में नुकसान का 72 घंटे में व्यक्तिगत क्लेम करवाने का प्रावधान है। किसान क्लेम दर्ज करवाने के लिए बीमा कम्पनी के टोल फ्री नंबर 18004196116 पर फोन करके बीमा क्लेम दर्ज करवा सकेंगे। निर्धारित प्रारूप में किसान स्वयं, जमीन और नुकसान की जानकारी भरकर ई-मेल भेजकर भी क्लेम दर्ज करवा सकते हैं। उक्त प्रारूप को बीमा कम्पनी या कृषि पर्यवेक्षक या अधिकारी को व्यक्तिगत भी दे सकते है। मोबाइल एप्प के जरिए भी बीमा क्लेम दर्ज करवा सकते है।

इनका कहना है
बेमौसम बारिश से मूंगफली व चारे का नुकसान होगा। किसान बीमा क्लेम दर्ज करवाएं। प्रशासन पिछली चार-पांच सीजन की तरह किसानों को अपने हाल पर छोडऩे के बजाए बीमा कंपनियों से बीमा क्लेम और आपदा
अनुदान राशि दिलवाने में गंभीरता बरते।
तुलछाराम सिंवर, प्रदेश मंत्री, भारतीय किसान संघ