
हाथ थे खून से लथपथ, पैर से फायरिंग कर चीन से छुड़ा दिए थे छक्के
18 नवम्बर 1962 का दिन। भारत-चीन युद्ध छिड़ चुका था। 13 कुमायूं बटालियन की ‘सी’ कम्पनी चुशूल सेक्टर में तैनात थी। बटालियन में 120 जवान थे, शून्य से 15 डिग्री कम की हड्डियां कंपा देने वाली ठंड थी। अचानक सुबह के समय चीनी सेना ने हमला बोल दिया। जैसे ही भारतीयों ने दुश्मन को पहचाना, उन पर लाइट मशीन गन, राइफल्स, मोर्टार और ग्रेनेड से हमला कर दिया और कई चीनी सैनिक मार गिराए।
युद्ध के समय मेजर शैतान सिंह खुद कंपनी की पांचों प्लाटून पर पहुंचकर अपने जवानों की हौसला-अफजाई कर रहे थे। इस बीच कुमाऊं कंपनी के लीडर मेजर शैतान सिंह गोलियां लगने से बुरी तरह जख्मी हो गए। उन्होंने सैनिकों को आदेश दिया कि एक मशीन गन लाने के लिए कहा। गन के ट्रिगर को रस्सी से एक पैर में बंधवाया। रस्सी की मदद से अपने एक पैर से फायरिंग करनी शुरू कर दी।
मेजर वहां लड़ते रहे। फरवरी 1963 उनका शव मशीन-गन के साथ मिला। पैरों में रस्सी बंधी थी। बर्फ की वजह से उनका शरीर जम गया था।
हालांकि भारत युद्ध हार गया था लेकिन बाद में पता चला कि चीन की सेना का सबसे ज्यादा नुकसान रेजांग ला पर ही हुआ था। चीन के सैकड़ों सैनिक इस जगह मारे गए थे। ये एकमात्र जगह थी जहां भारतीय सेना ने चीनी सेना को घुसने नहीं दिया था।
Published on:
19 Jun 2020 07:21 pm
