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मंच से लिया गया विधायक का नाम, कार्यक्रम स्थल से बाहर निकल गए चिकित्सा मंत्री, फलोदी की सियासत में छिड़ी नई बहस

Gajendra Singh Khinvsar: फलोदी में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला के दौरान चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर का विधायक पब्बाराम विश्नोई के संबोधन से ठीक पहले कार्यक्रम छोड़कर जाना राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया।

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Gajendra Singh Khinvsar

चिकित्सा मंत्री रवानगी के लिए कुर्सी छोड़ते हुए। फोटो- पत्रिका

फलोदी। कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला शुक्रवार को कृषि से ज्यादा राजनीति के कारण सुर्खियों में रही। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर का कार्यक्रम के बीच से अचानक रवाना होना और वह भी ठीक उस समय जब विधायक पब्बाराम विश्नोई को संबोधन के लिए मंच पर आमंत्रित किया जा रहा था, राजनीतिक गलियारों में दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। कार्यक्रम के दौरान जैसे ही विधायक पब्बाराम विश्नोई का नाम भाषण के लिए पुकारा गया, मंत्री खींवसर अपनी कुर्सी से उठे और सीधे कार्यक्रम स्थल से बाहर निकल गए।

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राजनीतिक गलियारों में उठे कई सवाल

विधायक माइक तक पहुंचे, लेकिन तब तक मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर परिसर से बाहर जा चुके थे। मंत्री के साथ अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में लोग भी बाहर निकल गए, जिससे विधायक का संबोधन लगभग खाली होते पंडाल में सिमटकर रह गया। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह केवल कार्यक्रम की व्यस्तता थी या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक संकेत छिपा था?

आमतौर पर किसी भी सरकारी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रहते स्थानीय विधायक का संबोधन प्रमुख माना जाता है, लेकिन यहां घटनाक्रम उल्टा नजर आया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर नेताओं की बॉडी लैंग्वेज और गतिविधियां भी कई बार बड़े संदेश छोड़ जाती हैं। ऐसे में विधायक के भाषण से ठीक पहले मंत्री का मंच छोड़ना चर्चाओं को और हवा दे गया।

नकली बीज घूसकांड की छाया भी चर्चा में

राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को हाल ही में सामने आए कथित नकली बीज घूसकांड से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा यह भी रही कि विधायक के निजी सहायक (पीए) का नाम प्रकरण में सामने आने के बाद सत्ता के भीतर असहजता बढ़ी है। हालांकि इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर खूब कानाफूसी होती रही।

डॉक्टरों की कमी के सवालों से बचने के भी कयास

फलोदी में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी लंबे समय से बड़ा मुद्दा बनी हुई है। दो दिन पहले जारी हुई चिकित्सकों की स्थानांतरण सूची में भी फलोदी को अपेक्षित राहत नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी है। कार्यक्रम स्थल के बाहर कई लोग स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और चिकित्सकों की नियुक्ति की मांग को लेकर ज्ञापन लिए खड़े थे। ऐसे में चर्चा यह भी रही कि मंत्री आमजन और मीडिया के तीखे सवालों का सामना करने के बजाय कार्यक्रम समाप्त होने से पहले ही रवाना हो गए। मंत्री ने ज्ञापन तो लिए, लेकिन लोगों का कहना था कि उनकी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा का अवसर नहीं मिला।

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