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जोधपुर के नए आरओबी की इस खामी से पैदल यात्रियों को होगी परेशानी, हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

इस मामले में सरकार की ओर से जवाब पेश किया गया कि सर्विस लेन के लिए नियमानुसार साढ़े सात मीटर जमीन छोड़ी गई।
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जोधपुर

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Harshwardhan Singh Bhati

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Updated: 15 Dec 2017, 1:30 PM IST

riktiya bheruji ROB of jodhpur

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RP BOHRA/जोधपुर. रिक्तिया भैरुजी स्थित मल्टीलेवल आरओबी के निर्माण व उसके दोनों ओर सर्विस लेन के लिए छोड़ी गई जमीन की चौड़ाई कम होने पर हाईकोर्ट ने गुरुवार को नाराजगी जताते हुए कहा- पैदल चलने वाले कहां चलेंगे। इस मामले में सरकार की ओर से जवाब पेश किया गया कि सर्विस लेन के लिए नियमानुसार साढ़े सात मीटर जमीन छोड़ी गई। इस पर जस्टिस संगीतराज लोढ़ा व जस्टिस विनीत माथुर की खंडपीठ ने सरकार और एनएचएआई से कहा कि साढ़े सात मीटर सर्विस लेन के अलावा डेढ़-डेढ़ मीटर फुटपाथ भी होना चाहिए, पैदल चलने वाले कहां चलेंगे, इसके अलावा सड़कों पर जो पेवमेंट्स खडे़ किए गए हैं। उनका क्षेत्रफल भी जोड़ा जाना चाहिए। इसलिए पिछली सुनवाई में नया प्रोजेक्ट बनाने को कहा गया था।

पूर्वी भाग में रहने वाले कहां से निकलेंगे

वर्ष २००७ में शहर के विभिन्न स्थानों पर आरओबी व फ्लाईओवर का निर्माण करने, ट्रेफिक व्यवस्था सुधारने व अतिक्रमण हटाने के लिए जारी सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के निर्देशों की पालना नहीं होने पर याचिकाकर्ता महेन्द्र लोढ़ा की ओर से दायर अवमानना याचिका में अधिवक्ता अशोक छंगाणी ने पैरवी करते हुए कहा कि करोड़ों की लागत के मल्टीलेवल आरओबी के निर्माण के बाद शहर के पूर्वी हिस्से से आकर भगत की कोठी, पाली व अहमदाबाद की ओर जाने वाले वाहनों, विशेष रूप से बसों के परिवहन के लिए आरओबी बॉटलनैक साबित हो रहा है। इसके निर्माण के समय अवार्ड के विपरीत जा कर रिक्तियां भैंरूजी स्थित पांच सितारा होटल व एक डॉक्टर के बंगले को बचाने के लिए कम जगह में आरओबी निर्माण कर दिया गया। इस पर खंडपीठ ने सरकारी अधिवक्ता को फिर से अगली सुनवाई १८ दिसंम्बर तक सर्विस लेन चौडी करने का प्रस्ताव पेश करने के निर्देश दिए।

जलाशयों में सीवर लाइन


अधिवक्ता छंगानी ने खंडपीठ में सुनवाई के दौरान कहा कि शहर के प्राचीन जलाशयों, सूरसागर, खरबूजा बावड़ी सहित फतेहसागर, गुलाब सागर, बाईजी तालाब आदि में सीवर लाइनें डाल दी गई है। इससे तालाबों व भूगर्भ का पानी दूषित हो रहा है तथा कई बीमारियां फैल रही हैं। खंडपीठ ने इस संम्बंध में भी अगली सुनवाई में जवाब पेश करने के आदेश दिए।