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IIT जोधपुर ने किया रिसर्च : अगर आपको गंध महसूस नहीं हो रही है तो हो सकता है कोरोना

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर ने अपने शोध में बगैर लक्षण वाले कोरोना रोगियों की पहचान करने का बेहतरीन तरीका विकसित किया है। शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होने से कई भारतीयों में खांसी-बुखार जैसे लक्षण नहीं मिलते हैं लेकिन क्लिनिकल जांच में उनमें कोरोना वायरस पाया गया है।
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जोधपुर

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Harshwardhan Singh Bhati

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Updated: 27 Apr 2020, 10:05 AM IST

IIT jodhpur research on symptoms of coronavirus

IIT जोधपुर ने किया रिसर्च : अगर आपको गंध महसूस नहीं हो रही है तो हो सकता है कोरोना

गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर ने अपने शोध में बगैर लक्षण वाले कोरोना रोगियों की पहचान करने का बेहतरीन तरीका विकसित किया है। शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होने से कई भारतीयों में खांसी-बुखार जैसे लक्षण नहीं मिलते हैं लेकिन क्लिनिकल जांच में उनमें कोरोना वायरस पाया गया है। आइआइटी जोधपुर ने अपने शोध पत्र में बताया है कि ऐसे रोगियों में गंध या सूंघने की क्षमता खत्म हो चुकी होती है। गंध के आधार पर अगर मरीजों की स्क्रीनिंग की जा जाती है तो रोगियों का तेजी से पता लगाया जा सकता है।

आइआइटी जोधपुर में बायोसाइंस विभाग के प्रोफेसर डॉ. सुरजीत घोष व उनकी टीम ने अप्रेल के प्रथम सप्ताह में ही दुनिया भर की रिपोट्र्स व रिसर्च के आधार पर स्वयं का रिसर्च तैयार किया, जिसे 9 अप्रेल को अमरीकन केमिकल सोसायटी के जर्नल न्यूरोसाइंस में प्रकाशित किया गया। आइआइटी जोधपुर ने पहली बार कोरोना वायरस क न्यूरो इनवेसिव करेक्टर के बारे में जानकारी दी।

मस्तिष्क कोशिका को करता है संक्रमित
कोरोना वायरस यानी सार्स सीओवी-2 नाक व मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। यह मस्तिष्क कोशिका न्यूरोन में एचएसीई-2 रिसेप्टर के सम्पर्क में आता है और उसे संक्रमित कर देता है। यही रिसेप्टर फेफड़ों की झिल्ली में भी होता है। कोरोना वायरस के फेफड़ों में संक्रमण से न्यूमोनिया होता है जबकि मस्तिष्क के पिछले भाग मैड्यूला आब्लागेटा के संक्रमित होने पर व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। मैड्यूला आब्लागेटा ह्रदय व श्वसन दर को नियंत्रित करती है।

पार्र्किंसन जैसे मस्तिष्क रोगियों के लिए खतरा
पार्र्किंसन सहित अन्य मस्तिष्क रोग से पीडि़त रोगियों को कोरोना वायरस से खतरा है। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को भी संक्रमित करता है। इसके अलावा श्वसन रोग से पीडि़त व्यक्ति भी सावधानी बरतें। हमारा यह रिसर्च लोगों में जागरुकता पैदा करने के लिए है।
- प्रो. सुरजीत घोष, बायो साइंस विभाग, आइआइटी जोधपुर