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15 साल से फरार इनामी को गैस चूल्हा मरम्मत के बहाने पकड़ा

खुद को गुजराती बताया, लेकिन राजस्थान नम्बर की बाइक से खुली पोल

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15 साल से फरार इनामी को गैस चूल्हा मरम्मत के बहाने पकड़ा

15 साल से फरार इनामी को गैस चूल्हा मरम्मत के बहाने पकड़ा

जोधपुर/फलोदी.
ऑपरेशन लिपिका के तहत पुलिस महानिरीक्षक रेंज जोधपुर की साइक्लॉनर टीम ने 15 साल से फरार कुख्यात गिरोह के 25 हजार रुपए के इनामी बदमाश को गुजरात के द्वारका में समुद्र किनारे से पकड़ लिया। वह नाम व पता बदलकर गैस चूल्हे की मरम्मत करने लग गया था और पुलिस ने गैस चूल्हा मरम्मत करवाने के बहाने बुलाकर उसे दबोच लिया।
पुलिस महानिरीक्षक (रेंज) विकास कुमार ने बताया कि लोहावट थानान्तर्गत पीलवा गांव के फतेहसागर निवासी श्यामलाल उर्फ रामलाल उर्फ कैलाश बहुचर्चित भंवरीदेवी प्रकरण में मुख्य आरोपी बिशनाराम बिश्नोई का चालक था। जो मादक पदार्थ तस्करी में लिप्त था। वह 15 साल से फरार था। जैसलमेर पुलिस में एक मामले में उस पर 20 हजार और फलोदी पुलिस ने पांच हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। उसको पकड़ने के लिए ऑपरेशन लिपिका अभियान चलाया गया। उप निरीक्षक कन्हैयालाल व प्रमीत चौहान ने तकनीकी पहलूओं से तलाश शुरू की तो उसके गुजरात में द्वारका में होने का पता लगा। पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस की एक टीम द्वारका भेजी गई, जहां तलाश के बाद फतेहसागर निवासी श्यामलाल उर्फ रामलाल उर्फ कैलाश पुत्र बाबूलाल को गिरफ्तार किया गया।
बिशनाराम गैंग की की गाडि़यां चलाता था
पुलिस का कहना है कि आरोपी श्यामलाल के खिलाफ वर्ष 2009 में ट्रैक्टर चोरी का मामला दर्ज किया गया था। वहीं, एक शिक्षक से मारपीट व राजकार्य में बाधा डालने के मामले में भी वांछित है। इसके अलावा वह कुख्यात बिशनाराम बिश्नोई गैंग के लिए मादक पदार्थ से भरे वाहन भी चलाता था। जिसके चलते वह एनडीपीएस एक्ट में भी वांछित था। वह चोरी की गाडि़यां खरीदने के साथ ही मादक पदार्थ तस्करी करता था। उसके खिलाफ 20 से अधिक मामले दर्ज हैं।
गैस चूल्हा मरम्मत के बहाने बुलाया
हेड कांस्टेबल महिपालसिंह के नेतृत्व में कांस्टेबल राकेश, रोहिताश्व, अशोक व महेन्द्र को द्वारका भेजा गया। एक महीने की तलाश के दौरान उसके गैस चूल्हा मरम्मत का मैकेनिक बनकर रहने का पता लगा। पुलिस ने गैस कम्पनियों से सम्पर्क किया।गैस चूल्हा मरम्मत करने के लिए अलग-अलग नम्बरों से उसे कॉल करवाए गए, लेकिन उसने तीन बार अलग-अलग आदमी भेजे थे। चौथी बार फिर बात करवाई गई तो श्यामलाल खुद चूल्हा ठीक करने पहुंचा। तभी सादे वस्त्रों में मुस्तैद पुलिस ने उसे पकड़ लिया। उसने खुद का नाम व पता गलत व खुद को गुजराती बताया, लेकिन उसके पास बाइक राजस्थान नम्बर की थी। इसलिए संदेह पुख्ता हो गया। सख्ती से पूछताछ में उसने अपना नाम व पता सही बता दिया।