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पैन इंडिया कमिटमेंट के साथ राजस्थान के लिए भी पीछे नहीं, स्टार्टअप के हर एवेन्यू की मेंटोरशिप के लिए हम तैयार: प्रो. अग्रवाल

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर के निदेशक के तौर पर काम करते हुए प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल ने बताया कि यहां रिसर्च पार्क भी स्थापित हो रहा है, 100 करोड़ की बिल्डिंग बन रही, इसमें 150 कंपनियों को स्थान देंगे।

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IIT jodhpur

प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल। फोटो- पत्रिका

जोधपुर। देश की तकनीकी क्षमता को अगले पायदान पर ले जाने के साथ राजस्थान की समस्याओं का तकनीकी समाधान ढूंढने में आइआइटी जोधपुर तेजी से आगे बढ़ रहा है। डिफेंस सेक्टर को मजबूत करने के साथ एम्स व एनएलयू के साथ मिलकर मील के नए पत्थर गढ रहा है तो उसके सामने चुनौतियों भी कम नहीं है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर के निदेशक के तौर पर काम करते हुए प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल को दो साल हो गए हैं। इस अवसर पर संदीप पुरोहित से खास बातचीत के प्रमुख अंश…।

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सवाल - आइआइटी जोधपुर में दो साल पूरे हो रहे हैं, ऐसे में आपकी दो प्रमुख उपलब्धियां क्या मानते है?
जवाब - पिछले दो साल में आइआइटी जोधपुर देश के सशक्त और मजबूत प्रौद्योगिकी संस्थाओं में उभर कर आया है। आधारभूत आरएंडडी और कोर्स में नवाचार आपको स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा। तकनीकी शिक्षा को नया आयाम देने की कोशिश की है। दूसरा मातृ भाषा में तकनीकी पढ़ाई शुरू करने वाला आइआइटी जोधपुर पहला संस्थान है। शिक्षा मंत्रालय ने हमें सराहा और हमें यह जिम्मेदारी दी है कि दूसरी आइआइटी में भी स्थानीय भाषाओ में तकनीकी शिक्षा देने में मदद करें। नए कोर्स से लेकर कैंपस तक सभी को आज की जरूरत के हिसाब से तैयार कर रहे हैं।

सवाल - राजस्थान ने आइआइटी के लिए पलक पावड़े बिछाए हैं, क्या आइआइटी राजस्थान के विकास में कोई भूमिका निभा सकती है?
जवाब - राजस्थानी होने से पहले एक भारतीय हूं और मेरे काम करने का दायरा पैन इंडिया है। यह सही है कि राजस्थान-जोधपुर ने हमें बहुत कुछ दिया है। हमारे काम के मिशन में राजस्थान भी एक हिस्सा है। राजस्थान के विकास मॉडल को आगे ले जाने के लिए हम हमेशा तैयार हैं। हमारी रिसर्च एंड डवलपमेंट टीम राजस्थान की कुछ प्रोब्लम्स पर काम कर रही है। सरकार के साथ मिलकर ऐसे एरिया चिह्नित किए जहां काम करने की जरूरत है, कई एक्सीलेंस सेंटर स्थापित हो रहे हैं। 23 आइआइटी हैं देश में, मेरा मानना है कि यदि देश के विकास के साथ प्रदेश के विकास में ये संस्थान अपना योगदान दे तो कोई हर्ज नहीं है।

सवाल - मरुधरा प्रतिबद्धता दिवस क्या है, इसके पीछे क्या मंशा रही?
जवाब - आपके पिछले प्रश्न से यह सीधा जुड़ा है। हम ढोल नहीं पिटते हैं। काम करने में विश्वास करते हैं। रिचर्च हमारा कोर एरिया है। हमारा उद़देश्य है कि यह साफ संदेश जाए कि पैन इंडिया के विकास के कमिटमेंट के साथ हम राजस्थान के लिए भी पीछे नहीं हटेंगे। मरुधरा प्रतिबद्धता दिवस में हम राजस्थान के लिए क्या कर रहे हैं, क्या प्लान कर सकते हैं, यह डिस्कस करेंगे। राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। वो सरकार की अपेक्षाएं रखेंगे तो हमारी फैकल्टी को भी यह स्थिति क्लीयर होगी कि किन क्षेत्रों में काम करना है। हमेशा ही हम अलग अलग क्षेत्रों में इस तरह के प्रयास करत रहते हैं।

सवाल - स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए भी क्या संस्थान काम कर रहा है?
जवाब - हमारा इंक्युबेशन सेंटर है टिस्क नाम से, राजस्थान सरकार के मिलकर हम काम कर रहे हैं। जिससे जोधपुर के लोगों व प्रदेश के अन्य शहरों के स्टार्टअप की हेल्प कर सके और मेंटरशिप कर सके। एक रिसर्च पार्क भी स्थापित हो रहा है, 100 करोड़ की बिल्डिंग बन रही, इसमें 150 कंपनियों को स्थान देंगे। यदि कोई इंडस्ट्री है जो प्रोडक्ट या प्रोसेस डवलप करना चाहती हैं तो रिसर्च पार्क में जगह ले सकती हैं। हमारी लैब व उपकरण का उपयोग कर सकते हैं और हमारे विशेषज्ञ भी उनकी मदद करेंगे।

सवाल - जोधपुर की अन्य राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के साथ भी आप काम कर रहे हैं, वह क्या है?
जवाब - सबसे ज्यादा तो हम एम्स जोधपुर के साथ काम कर रहे हैं। तीन एमओयू हैं और माटर्स्ट प्रोग्राम चलाया है। एक डाॅक्टर,एक इंजीनियर और फैकल्टी मेंबर काम करते हैं। हमारे इंजीनियर एक सेमेस्टर एम्स में इंडोर-आउटडोर में प्रोब्लम देखते हैं। फिर उनका समाधान करते हैं। वहीं एम्स के डॉक्टर को यहां तकनीकी स्किल देते हैं। प्रोटोटाइम भी डवलप होते हैं। उस तकनीक का एक स्टार्टअप खोलते हैं। मास्टर डिग्री पूरी होने पर उनके पास ज्ञान के साथ खुद की स्टार्टअप कंपनी होती है। दूसरा एनएलयू के साथ डिजिटल लॉ पर काम कर रहे हैं। काफी केस पेंडिंग है देश में, एआइ का इस्तेमाल कर कैसे न्याय जगत में परिणाम दिए जा सके, इस पर फोकस है। तीसरा आयुर्वेद के साथ आर्युजीनोमिक्स में भी काम कर रहे हैं।

सवाल - भारतीय सेना के साथ भी आइआइटी जोधपुर काम कर रहा है ?
जवाब - जो एडवांटेज हमारे पास है वह किसी अन्य आइआइटी के पास नहीं है। हमने डिफेंस के क्षेत्र में काम करने के लिए सैम मानेकशाॅ सेंटर स्थापित किया है। इसमें 30 फैकल्टी मेम्बर जुड़े हैं। हमारी सशक्त सेनाओं की तकनीकी प्रोब्लम का समाधान कर रहे हैं। ड्रोन-एंट्री ड्रोन तकनीक और ओमनी वारफेर में काम कर रहे हैं। बहुत सारी चीजें और हैं जिसका जिक्र यहां उचित नहीं है।

सवाल - अगले तीन साल में आपका क्या विजन है?
जवाब - जब मैं आया तो 250 फैकल्टी और 4400 स्टूडेंट थे। अब 350 के करीब फैकल्टी हो चुकी है। ्एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम सहित 10 हजार स्टूडेंट हो चुके हैं। अगले तीन साल में इसे 30 हजार तक ले जाना है। जब मेरे पास लोग होंगे तो ज्यादा समस्याओं का समाधान करेंगे, ज्यादा रिसर्च व काम होगा। 23 आइआइटी में हम स्पोर्टस, सांस्कृतिक पक्ष में 7वें नम्बर पर रहते हैं। 7 फर्स्ट जनरेशन आइआइटी है, जो 60-70 साल पुरानी है। अगले तीन साल में यदि हम बेहतर काम करते हैं तो देश के टॉप 5 तकनीकी संस्थानों में आने लायक हो सकेंगे, यही हमारा टारगेट भी है। मेरी कोशिश रहेगी कि हमारे फुट प्रिंट रहे।

सवाल - सरकार के संसाधन सीमित हैं। सेल्फ सस्टेन होने के लिए आप क्या प्रयास कर रहे हैं?
जवाब - आइआइटी को इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लोन लेना होता है, कुछ हिस्सा हमें रिपेमेंट करना होता है। अभी हमें 672 करोड़ का लोन मिला है। जिससे नए इंफ्रा पर काम कर रहे हैं। एक नए लोन के लिए भी प्रयास कर रहे हैं, जो मिलता है तो काफी काम होगा। हमारा रेवेन्यू सोर्स फीस है, लेकिन फीस बढ़ाना भारत सरकार पर निर्भर करता है। इसी कारण एग्जीक्यूटिव कार्यक्रम चलाते हैं। दो साल पहले 800 एग्जीक्यूटिव स्टूडेंट थे, जो अब 5 हजार हो गए हैं। इसे अगले तीन साल में 20 हजार तक बढ़ाना चाहते हैं। इससे रेवेन्यू जनरेशन होगा, इसको लोन रिपेमेंट कर सकेंगे, यह फाइनेंशियल सस्टेनेबल मॉडल होगा। इसके साथ ही रिसर्च सेंटर से भी फायदा होगा।

सवाल - इको फ्रेंडली कैंम्पस के लिए भी कुछ नवाचार किए हैं?
जवाब - मैं आइआइटी कानपुर से आया हूं और वहां फ्लोरा एंड फौना अच्छा था। फिर मैंने यहां कैंपस को ग्रीन करने की दिशा में काम किया। पहले 50 प्रजाति पक्षियों की थी, अब 80 प्रकार है और 450 हिरण हैं। राजस्थान से ज्यादा जल की उपयोगिता कोई नहीं समझता है, इसीलिए एक बूंद जल बाहर नहीं जाने देते। दो तालाब बनाए। एक चार और दूसरा दो एकड़ का। हिरणों व पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करते हैं। दो साल में 17700 पेड़ लगा चुके हैं, मियांवाकी फॉरेस्ट का प्लान कर रहे हैं। जब ज्यादा वैरायटी के पेड़ लगाते हैं तो बायो डायवर्सिटी होती है।

सवाल - भारत का तकनीकी भविष्य कैसा है, आपको अपने जीवन में कुछ रिग्रेट रहा है
जवाब - मैं अमरीका गया था और वहां नौकरी मिल गई थी, लेकिन लौटकर कानपुर जॉइन किया। क्योंकि जाने से पहले उन्होंने मुझे नौकरी दी थी और मैं वादा करके गया था कि दो साल में लौटूंगा। कानपुर में हमने देश की सबसे बड़ी इंजन रिसर्च लैब स्थापित की। यहां भी उच्च स्तर का रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। तकनीक में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। आइआइटी के जो छात्र है और जो पासआउट है वह भविष्य संवारने में भूमिका निभा रहे हैं और निभाएंगे। मैंने 25 साल रिसर्च किया है अब जिम्मेदारी मिली है कि हाउस कीपिंग करें, मेरा रिसर्च इफेक्ट हो रहा है। रात को अपना काम करने का प्रयास करता हूं, जीवन में रिग्रेट जैसा कुछ नहीं है। सिर्फ कर्म में विश्वास करता हूं बाकी कोई इच्छा नहीं है।