
बैंक मैनेजर की सतर्कता से धरे रह गए साइबर ठगों के मंसूबे। फोटो: पत्रिका
जोधपुर। साइबर ठगों ने पीएचईडी के 80 वर्षीय रिटायर्ड कर्मचारी सोहनलाल को डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर 31 लाख रुपए ठगने की कोशिश की, लेकिन यस बैंक की मैनेजर मनीषा पंवार की सतर्कता और साइबर पुलिस की त्वरित कार्रवाई से उनकी जीवनभर की जमा पूंजी बच गई। ठगों के डर से बुजुर्ग तीन बैंकों की एफडी तुड़वाकर रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर कराने पहुंच गए थे।
पुलिस के अनुसार 14 अक्टूबर को एक अज्ञात व्यक्ति ने सोहनलाल को वॉट्सऐप वीडियो कॉल किया और खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। उसने बुजुर्ग के आधार कार्ड का इस्तेमाल अनैतिक गतिविधियों और उनके बैंक खातों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग होने की बात कहकर गिरफ्तारी की धमकी दी। ठगों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए रकम कथित सरकारी खातों में सत्यापन के नाम पर जमा कराने का दबाव बनाया। उनका मोबाइल फोन भी ठगों ने हैक कर रखा था।
17 अक्टूबर को सोहनलाल 31 लाख रुपए ट्रांसफर कराने यस बैंक पहुंचे। मैनेजर मनीषा पंवार को बड़े लेन-देन पर संदेह हुआ। जांच में सामने आया कि जिस एक्सिस बैंक खाते में रकम भेजी जा रही थी, वह छह महीने से बंद था, लेकिन उसी दिन उसमें लाखों रुपए के ट्रांजेक्शन हो रहे थे। बुजुर्ग ने पहले बताया कि वे बेटे को पैसे भेज रहे हैं। संदेह गहराने पर मैनेजर ने उन्हें केबिन में बैठाकर पूछताछ की तो डिजिटल अरेस्ट की पूरी कहानी सामने आई। उन्होंने तुरंत साइबर पुलिस थाने के एएसआई कानसिंह को सूचना दी।
सोहनलाल की पत्नी का निधन हो चुका है और उनकी दोनों बेटियों की शादी हो गई है। वे घर में अकेले रहते हैं। ठगों ने उनकी इसी स्थिति का फायदा उठाकर उन्हें मानसिक दबाव में लिया। उपनिरीक्षक राजेश कुमार और कांस्टेबल धीरेन्द्र सिंह बैंक पहुंचे। पुलिस ने बुजुर्ग को समझाइश देकर ठगों के चंगुल से बाहर निकाला और 31 लाख रुपए की ठगी होने से बचा लिया।
Updated on:
18 Oct 2026 02:34 pm
Published on:
18 Oct 2026 02:33 pm
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