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जोधपुर की इन औद्योगिक इकाइयों पर पर गिरी गाज, बंद करने के दिए आदेश

- एनजीटी ने 19 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के दिए आदेश- व्यवस्थाएं सुधारने तक बंद रहेगी फैक्ट्रियां
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जोधपुर की इन औद्योगिक इकाइयों पर पर गिरी गाज, बंद करने के दिए आदेश


- व्यवस्था सुधार, 18 जून तक रिपोर्ट पेश करने के आदेश

जोधपुर . जोजरी नदी में प्रदूषण फैलाने वाली टैक्सटाइल व स्टील इंडस्ट्रियों पर एनजीटी की गाज गिरी। एनजीटी ने बुधवार को अपना निर्णय सुनाते हुए 19 फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश दिए। यह वहीं 19 फैक्ट्रियां है, जिनको एनजीटी की ओर से नियुक्त कोर्ट कमिश्नर डॉ अजीतप्रतापसिंह ने अपनी रिपोर्ट में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयां बताया था। एनजीटी ने फैक्ट्रियों को बंद करने के साथ ही, यह भी निर्देश दिए कि जब तक उक्त इकाइयों में व्यवस्थाएं नहीं सुधरेंगी, तब तक वे बंद रहेगी। व्यवस्थाएं सुधारकर 18 जून को पेश रिपोर्ट संतोषजनक पाए जाने पर ही फैक्ट्रियों को चालू करने संबंधी दिशानिर्देश दिए जाएंगे।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगी मॉनिटरिंग
एनजीटी ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उक्त 19 फैक्ट्रियों की मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा है। बोर्ड फैक्ट्रियों में खामियां सुधारने की जांच करेगा और एनजीटी को रिपोर्ट पेश करेगा। जिला कलक्टर भी इसकी मॉनिटरिंग करेंगे।

दो बार टली सुनवाई

जोजरी नदी में हो रहे प्रदूषण को लेकर ग्राम पंचायत अराबा के लोगों और यू आर बेनीवाल की ओर से दर्ज शिकायत पर एनजीटी ने बिट्स पिलानी के प्रोफेसर व डीन डॉ. अजीतप्रताप सिंह को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया था। जिनकी पेश रिपोर्ट पर 24 मई को निर्णय आना था। लेकिन इस दिन निर्णय नहीं आया और एनजीटी ने 29 मई को निर्णय के आदेश दिए। 29 मई को सुनवाई के दौरान केस का नम्बर नहीं आया, और सुनवाई 30 मई को रखी गई।

इन खामियों ने बंद कराई फैक्ट्रियां
- फैक्ट्रियों से पाइपलाइन के जरिए जेपीएनटी के सीईटीपी तक पहुंचने वाला प्रदूषित पानी पूरी तरह से उपचारित नहीं हो रहा।

- मापदंडों के अनुसार प्रदूषित पानी को उपचारित नहीं किया जा रहा ।
- फैक्ट्रियों का पानी सीईटीपी पाइप लाइन से रिवर्स होकर रीको के नालों से बह कर सीधा जोजरी नदी में जाना पाया गया।

- किसी फैक्ट्री में मीटर रीडिंग नहीं पाई गई।
- स्टील फैक्ट्रियों का पानी सीधा रीको नाले में जाना पाया गया।

- स्टील फैक्ट्रियों में प्रदूषित पानी को नापने का फ्लो मीटर नहीं पाए गए।
- श्रमिकों के मास्क, ग्लब्ज व उनकी सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं दिखी।

- स्टील फैक्ट्रियों में लॉग बुक नहीं पाई गई।
- फैक्ट्रियों में प्राइमरी ट्रीटमेंट फैसिलिटी नहीं मिली।

- अनुपचारित स्लज को रीको नाले में डिस्चार्ज करना पाया गया।

जेपीएनटी वसूल रहा करोड़ों रुपया, पर सर्विस नहीं

- जेपीएनटी की ओर से पाइपलाइन व पानी ट्रीट के लिए सदस्य इकाइयों से करोड़ों रुपए वसूलने के बाद भी सर्विस नहीं। (सदस्य इकाइयों से सालाना करीब 10 से 12 करोड़ वसूले जा रहे )।
- जेपीएनटी की ओर से फैक्ट्री से सीईटीपी तक डाली पाइपलाइन का रखरखाव नहीं।

- जेपीएनटी ने फैक्ट्रियों में छोटी पाइपलाइन डाली, जबकि पानी डिस्चार्ज की क्षमता बढ़ाता गया।
- पानी डिस्चार्ज की क्षमता बढ़ाने से छोटी पाइपलाइन दबाव नहीं झेल पाती।


अब आगे क्या...

एनजीटी ने जिन 19 इकाइयों को बंद करने के आदेश दिए है। उनमें व्यवस्थाए सुधरने पर और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सकारात्मक रिपोर्ट पेश होने पर ही इकाइयां चालू होने की संभावना है। रिपोर्ट में बताया गया कि जेपीएनटी से औद्योगिक इकाइयों का अपशिष्ट छोड़ा गया जो डायरेक्ट इनडायरेक्ट जोजरी नदी आसपास की जमीन में मिल गया।

टैक्सटाइल-स्टील की 406 इकाइयां जेपीएनटी से जुड़ी हुई
जोजरी व आसपास 41835.9 मेट्रिक टन स्लज छोड़ा