
राजस्थान के जोधपुर जिले के सेवाला गांव के निवासी वीरेंद्र सिंह सिसोदिया ने विश्व स्तर पर एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने हर भारतवासी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। वीरेंद्र सिंह ने दक्षिण अमेरिका के एंडीज पर्वतमाला में स्थित विश्व की सबसे ऊंची सक्रिय ज्वालामुखी चोटी 'ओजोस डेल सालाडो' (Ojos del Salado) पर सफलतापूर्वक आरोहण कर वहां भारत का राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' और "Incredible India" का ध्वज लहराया है।
6,893 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस चोटी को फतह करना किसी भी पर्वतारोही के लिए जीवन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जाता है। वीरेंद्र सिंह की यह विजय केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि राजस्थान के युवाओं के साहस और अटूट संकल्प की एक नई मिसाल है।
वीरेंद्र सिंह का यह सफर आसान नहीं था। जब वे शिखर की ओर बढ़ रहे थे, तब परिस्थितियां बेहद प्रतिकूल थीं:
वीरेंद्र सिंह ने शिखर पर पहुंचने के बाद न केवल तिरंगा फहराया, बल्कि पर्यटन मंत्रालय के अभियान "Incredible India" का ध्वज भी प्रदर्शित किया। इसके माध्यम से उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन की शक्ति का संदेश दिया। जोधपुर के एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की ब्रांडिंग करना उनकी दूरदर्शी सोच को दर्शाता है।
दुनिया के पर्वतारोहियों के लिए ओजोस डेल सालाडो एक 'अल्टीमेट डेस्टिनेशन' है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
वीरेंद्र सिंह सिसोदिया की इस सफलता की खबर जैसे ही जोधपुर के सेवाला गांव पहुंची, वहां दिवाली जैसा माहौल हो गया। ग्रामीणों और परिजनों ने आतिशबाजी कर और मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाईं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस पर खुशी जताते हुए कहा कि वीरेंद्र ने राजस्थान के 'साहस' की परंपरा को दुनिया के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी तक पहुंचा दिया है।
वीरेंद्र सिंह की यह उपलब्धि राजस्थान के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सिविल सेवा, सेना या खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। यह संदेश देता है कि संसाधनों की कमी या ग्रामीण पृष्ठभूमि आपकी सफलता में बाधक नहीं बन सकती।
Updated on:
25 Mar 2026 10:26 am
Published on:
25 Mar 2026 10:25 am
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