28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan: कब बदलेगी सोच, श्रमिक ने बेटे की चाह में पैदा कीं 11 बेटियां, 12वीं संतान हुआ बेटा, मुश्किल से बची मां-बेटे की जान

Jodhpur News 12th Pregnancy Son: उनके पति कनाराम मेघवाल ने बताया कि उनकी 25 साल की शादीशुदा ज़िंदगी में कमला देवी ने लगभग हर डेढ़-दो साल के अंतराल पर 11 बेटियों को जन्म दिया, जिनमें से 9 जीवित हैं और 2 की मृत्यु हो चुकी है।

2 min read
Google source verification

एआई की मदद से प्रतीकात्मक तस्वीर

Jodhpur News: राजस्थान के शेरगढ़ (जोधपुर) क्षेत्र से एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल प्रसव का मामला सामने आया है, जहाँ 11 बेटियों को जन्म दे चुकी एक महिला ने अपने 12वें प्रसव में एक बेटे को जन्म दिया है। यह प्रसव इतना जोखिम भरा था कि जच्चा और बच्चा दोनों की जान खतरे में थी, लेकिन शेरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHMC) के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता से दोनों सुरक्षित हैं।


शेरगढ़ क्षेत्र के खरजा खास गाँव की निवासी कमला देवी (48) ने शनिवार को 12वें प्रसव में बेटे को जन्म दिया। उनके पति कनाराम मेघवाल ने बताया कि उनकी 25 साल की शादीशुदा ज़िंदगी में कमला देवी ने लगभग हर डेढ़-दो साल के अंतराल पर 11 बेटियों को जन्म दिया, जिनमें से 9 जीवित हैं और 2 की मृत्यु हो चुकी है।

अत्यधिक जोखिम भरा था 12वां प्रसव

इस प्रसव को अत्यंत जटिल मानते हुए नर्सिंग ऑफिसर श्रवण कुमार परमार ने बताया कि लगातार 11 प्रसवों के कारण महिला का गर्भाशय (बच्चेदानी) काफी कमजोर हो चुका था। इस स्थिति में प्रसव के दौरान गर्भाशय फटने और पीपीएच (अत्यधिक रक्तस्राव) का खतरा काफी बढ़ गया था। परमार ने आगे बताया कि यह प्रसव अत्यंत जोखिमपूर्ण था। यदि प्रसव में कोई जटिलता आती, तो बच्चा और माँ दोनों की जान जा सकती थी।

डॉक्टरों ने सुनिश्चित किया सुरक्षित प्रसव

जटिलताओं को देखते हुए, स्त्री रोग विशेषज्ञ के निर्देशन में सीएचएमसी की टीम ने मोर्चा संभाला। टीम ने पूरी सावधानी बरतते हुए सफलतापूर्वक प्रसव कराया, जिससे माँ और नवजात शिशु दोनों सुरक्षित रहे। कनाराम मेघवाल के परिवार में पहले से ही बेटियों की शादियाँ हो चुकी हैं।

उनकी बड़ी बेटियाँ मोरो देवी, दुर्गा और रूपा की शादी हो चुकी है, जबकि ममता पढ़ाई छोड़ चुकी हैं। अन्य बेटियाँ रेखा दसवीं, दिव्या व आँसू आठवीं, माया तीसरी और धापू पहली कक्षा में अध्ययनरत हैं।11 बेटियों के बाद बेटे के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल है। चिकित्सा टीम की त्वरित कार्रवाई और कुशलता ने इस जटिल प्रसव को सुरक्षित बनाया, जो चिकित्सा जगत में एक बड़ी उपलब्धि है। कानाराम मेघवाल पेशे से श्रमिक हैं।