
Jodhpur: सांकेतिक तस्वीर- एआई जेनरेटेड
जोधपुर। दिल का बड़ा दौरा पड़ने के बाद 41 वर्षीय युवक की धड़कन थम गई। ब्लड प्रेशर तक रिकॉर्ड नहीं हो रहा था और हृदय की पंपिंग क्षमता सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत रह गई थी। हालत इतनी नाजुक थी कि हर पल चुनौतीपूर्ण था। ऐसे वक्त में एमडीएम अस्पताल की कार्डियोलॉजी टीम ने तत्काल सीपीआर और जरूरी आपात उपचार शुरू किया। धड़कन लौटने के बाद मरीज को वेंटिलेटर पर ही कैथ लैब ले जाया गया और करीब 15 मिनट के भीतर बंद धमनी को खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
एंजियोग्राफी में हृदय की प्रमुख एलएडी धमनी पूरी तरह बंद मिली। चिकित्सकों ने तत्काल रेस्क्यू एंजियोप्लास्टी कर धमनी को खोल दिया। इलाज के अगले ही दिन मरीज को होश आ गया और उसका वेंटिलेटर हटा दिया गया। करीब 10 दिन के उपचार के बाद मरीज को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
मरीज को नागौर से एमडीएम अस्पताल रेफर किया गया था। उसे एक्यूट एंटीरियर वॉल मायोकार्डियल इन्फार्क्शन यानी गंभीर प्रकार का हार्ट अटैक हुआ था। सीने में दर्द शुरू होने के लगभग साढ़े तीन घंटे बाद वह अस्पताल पहुंचा। इससे पहले सड़क हादसे में पसलियों में फ्रैक्चर होने के कारण उसे थ्रोम्बोलिसिस का इंजेक्शन नहीं दिया जा सका।
अस्पताल के सीसीयू में पहुंचते ही मरीज को कार्डियक अरेस्ट हो गया। चिकित्सकीय टीम ने बिना समय गंवाए सीपीआर शुरू किया। मरीज को इंट्यूबेट किया गया और आवश्यक शॉक दिया गया। काफी प्रयासों के बाद उसकी धड़कन वापस आई, लेकिन उस समय वह बेहोश था। उसकी पुतलियां फैली हुई थीं और ब्लड प्रेशर रिकॉर्ड नहीं हो रहा था।
कार्डियक अरेस्ट के बाद मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे वेंटिलेटर पर ही कैथ लैब ले जाया गया। वहां एंजियोग्राफी के दौरान भी उसकी स्थिति अस्थिर रही और वीटी/वीएफ के एपिसोड आए। टीम को दोबारा शॉक देना पड़ा।
एंजियोग्राफी में एलएडी धमनी 100 प्रतिशत ब्लॉक मिली। चिकित्सकों ने तत्काल एंजियोप्लास्टी की और बंद धमनी में रक्त प्रवाह बहाल किया। प्रक्रिया के बाद मरीज को वेंटिलेटर और हाई-डोज दवाओं के सहारे रखा गया।
इलाज का असर अगले दिन दिखाई दिया। मरीज को होश आ गया और उसकी स्थिति में सुधार के बाद वेंटिलेटर हटा दिया गया। इसके बाद चिकित्सकों ने लगातार निगरानी में उसका उपचार जारी रखा। करीब 10 दिन बाद हालत स्थिर और संतोषजनक होने पर उसे अस्पताल से घर भेज दिया गया।
इस आपात प्रक्रिया में कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित माथुर के नेतृत्व में डीएम रेजिडेंट्स, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. राकेश करणावत, डॉ. भरत और नर्सिंग टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकीय टीम के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट के बाद तुरंत सीपीआर, शॉक और बंद धमनी को जल्द खोलना मरीज के उपचार में अहम रहा।
Updated on:
16 Sep 2026, 9:13 PM IST
Published on:
16 Sep 2026, 9:13 PM IST
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