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पिछले पंद्रह सालों से जकड़ा जोधपुर का यह व्यक्ति जंजीरे खुलने पर करता है ये काम

आज उसकी इस दुदर्शा के बारे में जानकार हर किसी का दिल पसीज भी जाता है

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देचू/जोधपुर. आजादी किसे प्यारी नहीं होती है। लेकिन यदि किन्हीं कारणों के चलते जोधपुर के एक व्यक्ति को सालों से क्रूरता की जंजीरों में जकड़ कर रहना पड़ा। यह व्यक्ति कई सालों से आजादी के इंतजार में बेडि़यों से जकड़ा पड़ा है। लंबे बाल, तन पर मामूली से कपड़े और खाने-पीने का अता-पता तक नहीं। यही वजह है कि आज उसकी इस दुदर्शा के बारे में जानकार हर किसी का दिल पसीज भी जाता है। लेकिन इसके पीछे छिपी है एक कहानी। आइए जानते हैं कि किस कारण ये व्यक्ति जंजीरों से जकड़ा अपनी जिंदगी गुजार रहा है।

जिले की पंचायत समिति देचू की ग्राम पंचायत गुमानपुरा के पदमसिंह पुत्र मानसिंह जो पिछले पन्द्रह सालों से जंजीरों में जकड़ा पशु की तरह जीवन जीने को मजबूर हो रहा है। पत्रिका संवाददाता जब उसकी ढाणी में पहुंचा तो तीस साल का पदमसिंह एक कमरे के अंदर लोहे की जंजीरों से बंधा हुआ सो रहा था। उसके शरीर पर कपड़े भी नहीं थे और दुर्गंध व्याप्त थी। पांच भाइयों में सबसे छोटे पदमसिंह की पंद्रह साल की उम्र में ही दिमागी संतुलन बिगड़ गया था। इसके बाद उसका जीवन जंजीरों में कैद हो कर रह गया।

उपचार भी नहीं हुआ सफल


बहुत छोटी उम्र में अपना दिमागी तवाजन खोने के बाद पदमसिंह के घरवालों ने मथुरादास माथुर अस्पताल सहित कई चिकित्सकों और वैद्य हकीमों की सलाह भी ली लेकिन कोई इलाज उसके लिए कारगर साबित नहीं हो पाया। इसकी इस हालत को लेकर अब परिजन भी हार मान चुके हैं।

बूढ़े पिता करते हैं सेवा


दिमागी रूप से असंतुलित बेटे के इलाज में विफल होने के बाद परिजनों ने उसे जंजीरों से बांधना ही जरूरी समझा। परिजनों ने बताया कि एेसा नहीं करने पर वह लोगों के पीछे भागता है। इससे लोगों में भय व्याप्त हो रखा है। घर में कई परिजन होने के बाद भी पद्मसिंह के अस्सी वर्षीय पिता मानसिंह आज भी उसकी सेवा कर रहे हैं। जहां एक ओर बूढे़ मां-बाप इस उम्र में अपने बच्चों से यह उम्मीद करते हैं कि उनका ख्याल रखा जाए लेकिन इस केस में यह उलटा है। वह हर मौसम में यहां एेसे ही पड़े रहने को मजबूर है। इस पीडि़त की सुध न तो प्रशासन ले रहा है और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं।