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पहली बार अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में मानसून की विदाई

monsoon news jodhpur news - उत्तरी राजस्थान के साथ पंजाब-हरियाणा के कुछ हिस्सों से मानसून विदाई की घोषणा- इससे पहले 1961 में एक अक्टूबर को पीछे हटा था मानसून- इस सप्ताह पूरे उत्तर-मध्य से हट जाएगी नमी
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पहली बार अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में मानसून की विदाई

पहली बार अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में मानसून की विदाई

जोधपुर. एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन पैदा होने और धीरे-धीरे नमी कम होने के बाद बुधवार को भारतीय मौसम विभाग ने मानसून के लौटने की घोषणा कर दी। मानसून उत्तरी राजस्थान के बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और जैसलमेर व झुंझनूं के कुछ हिस्सों से पीछे हट गया है। पंजाब व हरियाणा के कुछ पश्चिमी हिस्से से भी मानसून की विदाई हो गई। एक दो दिन में पूरे राजस्थान से मानसून चला जाएगा। भारतीय मौसम विभाग के इतिहास में यह पहली बार है कि थार से मानसून की विदाई अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में हो रही है। इससे पहले 1961 को एक अक्टूबर को मानसून की विदाई हुई थी। वैसे 2007 में 30 सितम्बर और पिछले साल 29 सितम्बर को मानसून पीछे हटना शुरू हुआ था। उत्तरी-पश्चिमी और मध्य भारत में लगातार नमी कम होने से अगले तीन चार दिन में देश के बड़े हिस्से से मानसून चला जाएगा। इस बार देश में मानसून की अच्छी खासी बरसात हुई है।

40 प्रतिशत अधिक बारिश
राजस्थान में करीब एक सप्ताह की देरी से 2 जुलाई को मानसून आया था। इसके बाद इसने पश्चिमी राजस्थान में करीब बीस दिन देरी से प्रवेश किया। अगस्त में मानसून की जमकर बरसात हुई थी। सितम्बर के दूसरे पखवाड़े में भी मानसून की अच्छी बरसात हुई। राजस्थान में इस साल मानसून की औसतन बारिश 583.6 मिलीमीटर हुई है जबकि सामान्य बरसात का औसत 415 मिमी है। यानी 40 प्रतिशत अधिक बरसात हुई। प्रदेश के 33 जिलों में से केवल तीन जिले अलवर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में ही बारिश का टोटा रहा। वहीं 9 जिलों में सामान्य से अधिक बरसात और 12 जिलों में सामान्य से बहुत अधिक बरसार रिकॉर्ड की गई।

विभाग 30 सितम्बर तक ही मानता है मानसून
भारतीय मौसम विभाग का जयपुर कार्यालय मानसून की गणना 1 जून से 30 सितम्बर तक ही मानता है। एक अक्टूबर से मौसम विभाग ने अपने रजिस्टर बदल दिए थे यानी अक्टूबर में होने वाली बरसात को मानसून की बरसात नहीं मानकर उसे दूसरे सीजन में जोड़ा जाएगा।

बाढ़ नियंत्रण कक्ष भी लंबे चले
प्रदेश में सिंचाई विभाग की ओर से मानसून के समय में 1 जून से लेकर 30 सितम्बर तक सभी जिलों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष खोला जाता है। जो तहसीलों के साथ बांधों में पानी की आवक को रिकॉर्ड करता है। तीस सितम्बर तक मानसून नहीं हटने पर सिंचाई विभाग ने अग्रिम आदेश तक सभी बाढ़ नियंत्रण कक्षों को चालू रखने के निर्देश दिए थे। संभवत: अब एक-दो दिन में ये बंद हो जाएंगे।

इन राज्यों में हुई औसत से अधिक बारिश
मध्यप्रदेश, गुजरात, दादर व नगर हवेली, दमन व द्वीप, गोवा, महाराष्ट्र, अण्डमान-निकोबार, पुदूचेरी, कर्नाटक, लक्ष्यद्वीप, राजस्थान, सिक्किम।
इन राज्यों में कम हुई बरसात
जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखण्ड, मणिपुर, पश्चिमी बंगाल, झारखण्ड, चंडीगढ़, उत्तरप्रदेश

‘मानसून की विदाई शुरू हो गई है। अब तक के इतिहास में पहली बार 9 अक्टूबर से मानसून पीछे हटना शुरू हुआ है। हम भी मानसून की बरसात 30 सितम्बर तक ही मानते हैं।’
शिवगणेश, निदेशक, भारतीय मौसम विभाग जयपुर केंद्र