के. आर. मुण्डियार
जोधपुर.
दिल्ली व अहमदाबाद के अस्पतालों के ऐलोपैथी चिकित्सकों ने जिन मरीजों को घुटनों व स्पाइन के दर्द पर घुटने बदलवाने व ऑपरेशन की सलाह दी, उनमें से कई मरीजों का इलाज जोधपुर के आयुर्वेद अस्पताल में पंचकर्म चिकित्सा से होने का दावा किया जा रहा है।
कई उम्रदराज मरीजों का पहले चलना तो दूर, बैठना भी मुश्किल हो रहा था। ऐलोपैथी इलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन राहत नहीं मिली। कुछ समय से आयुर्वेद चिकित्सालय में पंचकर्म चिकित्सा से इलाज लिया तो अब पालती लगाकर बैठ सकते हैं और आराम से चल भी पा रहे हैं। ऐसे एक या दो मरीज नहीं बल्कि देश-विदेश के सैकड़ों मरीज हैं, जो डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के आयुर्वेद चिकित्सालय में इलाज ले रहे हैं और यहां के पंचकर्म सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस (पंचकर्म चिकित्सालय) में इलाज से स्वस्थ होकर कई मरीज घर लौट चुके हैं।
कुलपति प्रो. राधेश्याम शर्मा के निर्देशन में पंचकर्म विभागाध्यक्ष डॉ. महेशकुमार शर्मा, डॉ. ज्ञानप्रकाश शर्मा, डॉ. सरला ग्वाला, डॉ. आंचल मीणा, डॉ. सरिता मीणा, डॉ. मुरली मनोहर एवं डॉ. नथमल आदि प्रशिक्षित थैरेपिस्ट्स के सहयोग से पंचकर्म सेन्टर में मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
इलाज पूर्व व बाद के एक्सरे में आया फर्क-
आयुर्वेद अस्पताल में पंचकर्म चिकित्सा से इलाज करवाने वाले मरीजों के घुटनों के इलाज पूर्व व इलाज बाद के एक्सरे में बदलाव आ रहे हैं। यानि इलाज पूर्व जो परेशानी एक्सरे में दिखाई दे रही थी, पंचकर्म थैरेपी व पूरे इलाज के बाद एक्सरे में वह परेशानी दूर हो गई।
देश-विदेश से आ रहे मरीज-
पंचकर्म विभागाध्यक्ष डॉ. महेश कुमार शर्मा ने बताया कि विवि के आयुर्वेद चिकित्सालय में पंचकर्म चिकित्सा में स्नेहन, स्वेदन, वमन, विरेचन, बस्ति, नस्य, रक्तमोक्षण, शिरोधारा, शिरोवस्ति कर्म आदि प्रक्रिया के जरिए माइगे्रन, जोड़ों का दर्द, पक्षाघात (लकवा), मधुमेह, त्वचा रोग, सर्वाइकल, स्पोन्डिलाइटिस, साइटिका आदि पुराने दर्द का इलाज किया जा रहा है। यहां जोधपुर के अलावा मुम्बई, दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकाता जैसे महानगर, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, गुजरात, उत्तराखण्ड के शहरों के मरीज लगातार आ रहे हैं। यहां न्यूजीलैण्ड, यूके, इटली, स्विट्जरलैण्ड, जर्मनी के चिकित्साकर्मी एवं मरीज विजिट करने आए और परामर्श लिया।
इसलिए खास है जोधपुर का पंचकर्म इलाज-
वैसे प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर आयुर्वेद विभाग के अस्पतालों में पंचकर्म केन्द्र खोल रखे हैं। लेकिन वहां प्रशिक्षित थैरेपिस्ट व संसाधन का अभाव हैं। कई जगहों पर पद रिक्त हैं। जोधपुर के आयुर्वेद विश्वविद्यालय में संचालित पंचकर्म केन्द्र को सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस (राजस्थान में एकमात्र) केे रूप में संचालित किया जा रहा है। यहां विवि में प्रशिक्षित व केरल से प्रशिक्षित तकनीशियन लगा रखे हैं। इसलिए यहां की पंचकर्म चिकित्सा केरला व फाइव स्टार होटल्स के समतुल्य मानी जा रही है।
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केस-1-
‘ घुटने बदलवाने की जरूरत ही नहीं पड़ी ‘-
15 साल से घुटनों के दर्द से परेशान थी। दिल्ली के प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों ने घुटने का ऑपरेशन करने एवं बदलने का परामर्श दिया। कुछ समय पहले डिफेंस लैब में कार्यरत मेरे पुत्र की सलाह पर जोधपुर आयुर्वेद चिकित्सालय में यहां आकर परामर्श लिया व 21 दिन तक पंचकर्म चिकित्सा से इलाज करवाया। अब आराम से चल पा रही हूं। पालती मारकर बैठ भी सकती हूं।
-स्नेहलता गुप्ता (66), दिल्ली
केस-2
अहमदाबाद में ऑपरेशन का बोला, यहां पंचकर्मसे ठीक हो गया-
मेरी पत्नी पिंकी को स्पाइन में दर्द एवं एक पैर में सुनापन (लकवा जैसी स्थिति) की बीमारी थी। अहमदाबाद के सभी प्रमुख अस्पतालों में परामर्श लेकर ऐलोपैथी इलाज भी लिया, लेकिन आराम नहीं मिला। वहां ऑपरेशन की सलाह दी। जोधपुर आयुर्वेद चिकित्सालय आकर 21 दिन पंचकर्म थैरेपी व इलाज लिया। अब दर्द नहीं हैं, आराम से बैठ सकती है, चल सकती है और कमर को झुका भी सकती है।
-दलपतसिंह राजपुरोहित, अहमदाबाद
केस-3
एम्स में इलाज करवाया, आयुर्वेद से मिली राहत-
मेरे बेटे अतुल (4 वर्ष) को जन्म से गर्दन नहीं संभालने की समस्या थी। एक हाथ भी नहीं हिल पा रहा था और बैठ भी नहीं पा रहा था। एक साल तक जोधपुर एम्स में इलाज लिया, चिकित्सकों ने सेरेबल पॉल्सी बीमारी बताई। इलाज से भी कोई राहत नहीं मिली। आयुर्वेद चिकित्सालय में तीन माह से इलाज करवा रही हूं। यहां काफी राहत मिली। अब बच्चा गर्दन भी संभाल पा रहा है। बैठ पा रहा है और बोलने भी लगा है।
-शोभा, बासनी, जोधपुर
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वर्ष 2018 में पंचकर्म विभाग में उपचार
-5236 मरीजों का ओपीडी में इलाज।
-13851 मरीजों का आईपीडी में इलाज।
-3192 संधिवात, संधिशोध (जोड़ों का दर्द) रोगियों की चिकित्सा की गई।