
फाइल फोटो- पत्रिका
सशरीर भगवान के दर्शन सिद्ध ही कर सकता है। राजस्थान पत्रिका एक समाचार पत्र है, आत्मा के साथ। इसकी आत्मा सिद्ध है। इसीलिए जोधपुर में रोज ब्रह्म मुहूर्त में 47 साल से अपने अधिपति पाठक से मिल पा रहा है। पत्रिका के वटवृक्ष का बीज परम श्रद्धेय कर्पूर चंद्र कुलिशजी ने रखा। यह वर्ष उनका जन्म शताब्दी वर्ष है। उनके द्वारा रोपित मूल्यों और संस्कारों के प्रवाह से ही पत्रिका निरंतर पुष्पित और पल्लवित हो रहा है।
पत्रिका जोधपुर में पिछले 47 साल से समाज में परिवर्तन के अग्रदूत की भूमिका निभा रहा है। हम प्रगति और बदलाव के पैरोकार हैं। पाठक की आस्था के साथ हैं, पर झूठ और जिद के साथ नहीं हैं। जन सरोकारों से लेकर समाज के वंचित वर्ग के हक की आवाज ही सदैव हमारे समाचारों की परिधि रहा है। जात- पंथ-मजहब में पत्रिका ने कभी भेद किया नहीं। नेरेटिव सेट करने के लिए समाचारों के तथ्यों के साथ छेड़छाड़ के रास्ते से वास्ता रखा नहीं। सोशल मीडिया के कचरे से लेकर पश्चिम के पेज-थ्री के समाचारों की झूठन को परोसने में हमारा विश्वास नहीं रहा है। ग्राउंड पर हो रही हर गतिविधि पर हमारी पैनी नजर रहती है।
जोधपुर पत्रिका ने मारवाड की हर छोटी बड़ी या बुनियादी समस्या को उठाया ही नही बल्कि उसको अंजाम तक पहुंचाया है। धोरों में पानी के लिए राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल योजना से लेकर रिफाइनरी तक, क्षेत्र के विकास की उड़ान का पथ प्रदर्शक पत्रिका ही रहा है। लूणी-बांडी-जोजरी नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए हमेशा आवाज उठाई है। शहर के छोटे बडे तालाबों के पुनरुत्थान के लिए भी भागीरथ प्रयासों से कौन परिचित नहीं है। पहले गुलाब सागर के उत्थान में और अब चतुरसागर के लिए 6 करोड़ की राशि को स्वीकृत कराने के पीछे पत्रिका के अभियान ही हैं। एलिवेटेड रोड के नक्शे जल्द ही जमीन पर लाएंगे। जैसे रेलवे की फुट ओवरब्रिज की सौगात जोधपुर को अब दस्तक दे रही है। उद्योग-धंधे फले फूलें। इसके लिए इडंस्ट्रियल कॉरिडोर के मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाया है।
जोधपुर के विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के साथ-साथ संस्कृति और विरासत को संजोए रखने के अपने दायित्व से कभी पीछे नहीं हटे हैं। पर्यटकों की संख्या बढ़े। वे सिर्फ जोधपुर को छूकर आगे नहीं बढ़े, यहां ठहरें इसके लिए यह जरूरी है कि जोधपुर को हैरिटेज साइट का दर्जा मिले। हमारा शहर 566 साल पुराना है। हमारा अपना इतिहास है, अपनी संस्कृति है, परंपराएं हैं। खानपान तो पूरी दुनिया में सबसे निराला है ही। पत्रिका का कारवां इन सब को समेटे हुए पिछले 47 साल से लगातार आगे बढ़ रहा है तो वह सिर्फ जोधपुर से मिल रही अपनायत के कारण। हमें विश्वास है कि पाठकों के प्रेम और अपनायत का यह क्रम अनवरत जारी रहेगा। हम अपने देवतुल्य पाठकों को यह विश्वास दिलाते हैं कि उनकी कसौटी पर सदैव खरे उतरेंगे। आपका संबल ही हमारा प्रेरणा पुंज है। कोटि-कोटि नमन्।
sandeep.purohit@epatrika.com
Updated on:
16 Feb 2026 05:27 pm
Published on:
15 Feb 2026 05:22 pm
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