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निगहबान- कुछ ख्वाब पूरे हुए, कुछ ख्वाहिशें बाकी

डीएमआईसी परियोजना काफी समय से अधर झूल में थी। इस पर सरकार ने कुछ गंभीरता दिखाई है। जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र के लिए 3600 हेक्टेयर भूमि का विकास और पहले चरण में 600 करोड़ की आधारभूत संरचना पर खर्च औद्योगिक भविष्य की दिशा तय कर सकता है।

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एआई फोटो

संदीप पुरोहित
मारवाड़ सदियों से पानी का ही नहीं, विकास का भी प्यासा रहा है। हमारी जरूरतों की लंबी फेहरिस्त है। बजट की तस्वीर बिलकुल साफ है आधारभूत ढांचे, पर्यटन और पेयजल जैसी मूलभूत जरूरतों पर केंद्रित रहा है। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने ऑरेंज इकॉनोमी पर भी फोकस किया है, जिसका फायदा मारवाड़ को मिला है। भजनलाल सरकार के तीसरे बजट में पश्चिमी राजस्थान को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं हुई हैं। उनका स्वागत है, लेकिन जब गहराई से देखा जाए तो बहुत कुछ बाकी भी नजर आता है।

जोधपुर व पश्चिमी राजस्थान को औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण के लिए सीईटीपी निर्माण की बड़ी घोषणा मिली है। बालोतरा सहित अन्य स्थानों के लिए एक हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे जोधपुर-पाली क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की संभावना है। यदि यह योजना समय पर और प्रभावी ढंग से लागू होती है तो वर्षों से प्रदूषण की मार झेल रहे इलाकों को कुछ राहत तो निश्चत तौर पर मिलेगी। पत्रिका लगातार प्रदूषण के मुद्दे को उठाता रहा है। यह राहत स्वागत योग्य है, पर हमारी जरूरत इससे कही अधिक है।

डीएमआईसी परियोजना काफी समय से अधर झूल में थी। इस पर सरकार ने कुछ गंभीरता दिखाई है। जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र के लिए 3600 हेक्टेयर भूमि का विकास और पहले चरण में 600 करोड़ की आधारभूत संरचना पर खर्च औद्योगिक भविष्य की दिशा तय कर सकता है।

सड़क, अंडरपास, राव जोधा मार्ग के विकास और पेयजल पाइपलाइन सुधार जैसी घोषणाएं शहरी जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश हैं। जोधपुर में स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर में स्पेस गैलरी बनेगी, जिससे युवाओं को अंतरिक्ष उपलब्धियों की जानकारी मिलेगी। पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए मेजर शैतान सिंह कौशल विकास एवं प्रशिक्षण केंद्र और जोधपुर-शेरगढ़ में इंटीग्रेटेड कॉम्प्लेक्स का निर्माण भी अहम कदम है। केंद्रीय कारागृह की घोषणा भी की गई है।

हेल्थ सेक्टर में बजट में 12 मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर दिए, लेकिन बड़े अस्पतालों में नई कैथ लैब या विशेष विभागों की स्वीकृति नहीं मिलने पर थोड़ी निराशा है। पश्चिमी राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं के लिए यहां विशेष प्रयास की आवश्यकता है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर यहीं से है, पर हाल वही है। दिया कुमारी ने लंबे समय से अधूरी चल रही थार सांस्कृतिक सर्किट की बजट घोषणा भी की है। इससे पर्यटन क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। खींचन-फलोदी वेटलैंड के लिए इंटीग्रेटेड प्लान बनेगा। जैसलमेर के साथ बाड़मेर को जोडऩा एक रणनीतिक निर्णय माना जा सकता है। किराडू मंदिर का जीर्णोद्धार, खुहड़ी, पोकरण और कुलधरा में पर्यटन विकास कार्य क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेंगे। यदि इन योजनाओं को योजनाबद्ध ढंग से लागू किया गया तो बॉर्डर टूरिज्म नई आर्थिक ऊर्जा दे सकता है।

पेयजल के क्षेत्र में 800 से अधिक गांवों को इंदिरा गांधी लिफ्ट कैनाल का पानी मिलना बड़ी राहत है। रेगिस्तानी अंचल में पानी ही असली विकास है। फिर भी कुछ महत्वपूर्ण अपेक्षाएं अधूरी रहीं। नए औद्योगिक क्षेत्र या स्पेशल इकोनॉमिक जोन की घोषणा नहीं हुई। मंडी टैक्स में राहत का अभाव कृषि आधारित उद्योगों पर ब्रेक लगाएगा। उम्मेद सागर बांध के पुनर्जीवन और स्टोरेज सेंटर की मांग भी अनसुनी रह गई।

बालोतरा को दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जोडऩा भी बहुत आवश्यक है औद्योगिक विकास के लिए, विशेषकर जब रिफाइनरी परियोजना आकार ले रही है। जोधपुर मारवाड के विशेष संदर्भ में कुल मिलाकर यह बजट प्रदूषण, बुनियादी ढांचे और पर्यटन पर केंद्रित एक संतुलित प्रयास है, लेकिन पश्चिमी राजस्थान जैसे विस्तृत और चुनौतियों से भरे क्षेत्र के लिए अभी और ठोस, दीर्घकालिक दृष्टि की आवश्यकता है। घोषणाओं से अधिक महत्वपूर्ण उनका क्रियान्वयन होगा। आखिरकार विकास का असली पैमाना कागज नहीं, जमीन होती है।

कुछ ख्वाब पूरे हुए, कुछ ख्वाहिशें बाकी हैं,
ये जिंदगी है साहब, यहां हिसाब हमेशा बाकी है।

sandeep.purohit@in.patrika.com