21 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

NLU जोधपुर का 18वां दीक्षांत समारोह : चीफ जस्टिस के हाथों 24 मेधावियों को मिला स्वर्ण पदक, 3 ने हासिल की पीएचडी की उपाधि

दीक्षांत समारोह में वर्ष 2025 में उत्तीर्ण 176 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 124 स्नातक, 49 स्नातकोत्तर और 3 शोधार्थी शामिल थे।

2 min read
Google source verification
nlu jodhpur 18th convocation

एनएलयू जोधपुर का 18वां दीक्षांत समारोह। फोटो : पत्रिका

Jodhpur News: राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर में शनिवार को 18वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। यह समारोह विश्वविद्यालय के रजत जयंती वर्ष यानी 25 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा के उपलक्ष्य में खास रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक, संकाय सदस्य और न्यायिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।

विद्यार्थियों को दिए गए स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह में वर्ष 2025 में उत्तीर्ण 176 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 124 स्नातक, 49 स्नातकोत्तर और 3 शोधार्थी शामिल थे। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए 24 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक भी दिए गए।

समारोह की अध्यक्षता राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने की। वहीं समारोह के मुख्य अतिथि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत रहे। अपने संबोधन में CJI विद्यार्थियों को कानून की बदलती प्रकृति को समझने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कानून कोई स्थिर व्यवस्था नहीं, बल्कि समाज के साथ विकसित होने वाली जीवंत प्रणाली है।

उन्होंने आग्रह किया कि वे कानून को आम लोगों के लिए सरल, सुलभ और न्यायपूर्ण बनाने की दिशा में काम करें तथा अपने पेशेवर जीवन में ईमानदारी और संवैधानिक मूल्यों को सर्वोच्च रखें।

वकालत को बताया सेवा का मार्ग

कार्यक्रम में न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई तथा न्यायमूर्ति संदीप मेहता सहित कई न्यायाधीश विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा कि विधि केवल एक पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सेवा का मार्ग है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण मूल्य है और सफलता का अर्थ केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज और न्याय की सेवा भी है।