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जोधपुर: आसाराम की बैरक में बंद हैं सोनम वांगचुक, बंदियों वाला खाना दे रहे, कैमरों से 24 घंटे नजर

लद्दाख के लेह में हिंसा के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तारी के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अब जोधपुर सेन्ट्रल जेल में रखा गया है।

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जोधपुर

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kamlesh sharma

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विकास चौधरी

Oct 03, 2025

Sonam Wangchuck

फोटो पत्रिका

जोधपुर। लद्दाख के लेह में हिंसा के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तारी के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अब जोधपुर सेन्ट्रल जेल में रखा गया है। वांगचुक को जोधपुर जेल में एक सप्ताह हो चुका है और वो आसाराम वाले बैरक में बंद हैं। उन पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है और वो सीसीटीवी कैमरों की नजर में भी हैं।


सूत्रों के अनुसार सोनम वांगचुक को जेल में आए सात दिन हो चुके हैं। चूंकि आसाराम इलाज के लिए बाहर अस्पताल में भर्ती है इसलिए उसकी बैरक खाली थी। ऐसे में अब उस बैरक में सोनम वांगचुक को रखा गया है। वहीं पर उन्हें सुबह नाश्ता दिया जाता है और फिर दोपहर व शाम को अन्य बंदियों वाला ही खाना दिया जा रहा है। वांगचुक की तबीयत भी ठीक बताई जाती है।

पत्नी के मिलने आने की सूचना से अलर्ट

सीकर सांसद अमराराम मंगलवार को जोधपुर जेल के बाहर आए थे और सोनम वांगचुक से मिलने की इच्छा जताई थी, लेकिन जेल प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी। ऐसे में वो बिना मिले लौट गए थे। इस बीच सोनम वांगचुक की पत्नी के मिलने आने की सूचना से न सिर्फ जेल प्रशासन बल्कि पुलिस भी गुरुवार दिनभर अलर्ट पर रही। सुबह से शाम तक जेल के बाहर पुलिस तैनात रही, लेकिन सोनम वांगचुक की पत्नी जोधपुर नहीं पहुंची।

जेल के बाहर बैरिकेडिंग, आमजन परेशान

सोनम वांगचुक जेल में बंद है, जहां सुरक्षा के हर बंदोबस्त किए गए हैं। जेल के बाहर भी पुलिस ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त कर रखे हैं। जेल की तरफ मुड़ते ही सरकारी प्रेस के पास बैरिकेड्स लगाकर पुलिस तैनात कर दी गई। जेल के आगे से रेलवे स्टेशन के पिछले गेट जाने वाले यात्री परेशान होते रहे। बैरिकेड्स के पास ही पुलिस ने उन्हें रोकना शुरू कर दिया। इससे आमजन परेशान होते रहे।

रिहाई की मांग को लेकर धरना

उधर, फ्रेंड्स ऑफ लद्दाख, फ्रेंड्स ऑफ नेचर फॉलफॉन के बैनर तले जिला कलक्टर कार्यालय के बाहर धरना देकर सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग की गई। संगठन के आरके मेघवाल ने बताया कि सोमन वांगचुक को जल्द से जल्द रिहा किया जाए। साथ ही पर्यावरणीय संतुलन व परिस्थितियों की रक्षा के लिए जन जागरूकता अभियान को बढ़ावा देने, राज्य व केन्द्र सरकार लद्दाख के लिए ठोस नीतियां बनाने, युवाओं व नागरिक को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाए, लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए।