
Dr. Sarvepalli Radhakrishnan Rajasthan Ayurved University,patrika photo
Ayurveda Research: जोधपुर के डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में पिछले 15 वर्षों से मौसमी सर्दी, जुकाम और बुखार के उपचार में उपयोग किए जा रहे वातश्लेष्मिक ज्वरघ्न क्वाथ (काढ़ा) को आधुनिक वैज्ञानिक परीक्षण में सुरक्षित पाया गया है। विवि के शोधकर्ताओं ने ओईसीडी-407 प्रोटोकॉल के तहत 28 दिनों तक विस्टर चूहों पर किए गए सब-एक्यूट टॉक्सिसिटी अध्ययन में पाया कि इस काढ़े का लिवर, किडनी और हृदय पर कोई विषाक्त या संरचनात्मक दुष्प्रभाव नहीं पड़ा।
शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित स्कोपस इंडेक्सडजर्नल एनाल्स ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन में तीन वर्ष की समीक्षा प्रक्रिया के बाद प्रकाशित हुए हैं। मुख्य शोधकर्ता रसशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रवि प्रताप सिंह ने कुलगुरु प्रो. (डॉ.) गोविन्द सहाय शुक्ल, पूर्व कुलगुरु प्रो. पी. के. प्रजापति, डॉ. मनीषा गोयल और डॉ. राजाराम अग्रवाल के साथ यह अध्ययन किया। कोविड-19 के दौरान इस काढ़े के व्यापक उपयोग के बाद कुछ दुष्प्रभाव संबंधी शिकायतें सामने आई थीं, जिनकी वैज्ञानिक जांच के लिए यह अध्ययन किया गया। कोरोनाकाल में भी काढ़े की महत्ता को और उपयोग लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ। हालांकि काढ़े में शामिल सक्रिय तत्वों को लेकर वैज्ञानिक सत्यापन अब जाकर हुआ है।
इस काढ़े में वासा (अडूसा), कंटकारी (भटकटैया), हल्दी, गिलोय, सोंठ, भारंगी तालिशपत्र, भुई आंवला, मुलेठी, तुलसी, काली मिर्च और लौंग सहित 12 औषधीय वनस्पतियों का उपयोग किया गया है।
शोध में विषाक्तता परीक्षण के साध्य काढ़े के 12 औषधीय घटकों का भी एचपीटीएलसी तकनीक से विश्लेषण किया गया। इसमें यूजेनॉल, करक्यूमिन और उसौलिक एसिड जैसे जैव-सक्रिय तत्वों की पुष्टि हुई, जो सूजन कम करने, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस घटाने और वायरस संबंधी प्रक्रियाओं पर प्रभावी माने जाते हैं। साथ ही फॉर्म्युलेशन की गुणवत्ता का भी वैज्ञानिक सत्यापन किया गया।
आयुर्वेदिक औषधियों को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता दिलाने के लिए पारंपरिक ज्ञान के साथ वैज्ञानिक प्रमाण आवश्यक है।
वातश्लेष्मिक ज्वरघ्न ग्रेन्यूल्स न केवल गुणवत्ता नियंत्रण के मानकों पर खरा उत्तरा है बल्कि इन्फ्लुएंजा और अन्य श्वसन रोगों के उपचार के लिए भविष्य में व्यापक क्लीनिकल शोध की आधारशिला भी बनी है।
डॉ. रवि प्रताप सिंह, रसशास्त्र, भैषज्य कल्पना विभाग, आयुर्वेद विवि जोधपुर
Published on:
03 Jul 2026 06:58 am
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