
पुराने हाईकोर्ट में हेरिटेज भवन के साथ सेल्फी का रहा क्रेज, न्यायाधीशों के साथ अधिवक्ताओं ने खिंचवाई फोटोज
जोधपुर. हर किसी की आंखें राजस्थान हाईकोर्ट के हेरिटेज भवन के मुख्य द्वार और उसके शिखर पर लहरा रहे तिरंगे को देख रही थी। अचानक अपने बीच मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति और साथी न्यायाधीशों को पाकर अधिवक्ता झुंड में इक_ा होने लगे और फिर शुरुआत हुई सेल्फी लेने की। हेरिटेज भवन की यादों को अपने मोबाइल में कैद करने के लिए हर कोई उतावला हो गया। हेरिटेज भवन प्रांगण में दोपहर करीब एक बजे शुरू हुआ सेल्फी का क्रेज शाम तक बरकरार रहा। भवन के साथ यादें संजोने के लिए न्यायाधीश भी पीछे नहीं रहे। शुरुआत मुख्य न्यायाधीश महांति के साथ फोटो सेसन और सेल्फी से हुई। उनके सहज अंदाज ने हर किसी को प्रभावित किया। इसके बाद न्यायाधीश विजय विश्नोई, न्यायाधीश डा.पुष्पेंद्रसिंह भाटी, न्यायाधीश दिनेश मेहता और न्यायाधीश विनित कुमार माथुर ने भी देर तक अधिवक्ताओं तथा हाईकोर्ट के कार्मिकों के साथ फोटो खिंचवाए।
याद आए वकालत के दिन
न्यायाधीश विजय विश्नोई, अरुण भंसाली तथा दिनेश मेहता अधिवक्ताओं के साथ चहलकदमी करते हुए हेरिटेज परिसर में उन अधिवक्ता चैम्बर्स में भी गए, जहां कभी बतौर अधिवक्ता उन्होंने काम किया था।
अधिवक्ताओं ने कहा, नहीं भुला सकते न्याय का यह मंदिर
लंबे समय तक हेरिटेज भवन में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं का कहना है कि इस प्रांगण से विदा लेने की सोचने मात्र से मन भारी हो जाता है, परंतु सतत विकास और जरूरत को देखते हुए नवीनता को अंगीकार करना भी जरूरी है। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी ने कहा, पिछले चालीस साल तक यह भवन उनकी कर्मभूमि रहा है। इसे छोड़ते वक्त मन में दुख है। यहां बिताए पल हमेशा याद रहेंगे, लेकिन परितर्वन प्रकृति का नियम है। हमें और बेहतर भविष्य और सुविधाओं की ओर भी देखना है। असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया संजीत पुरोहित ने कहा, इन दो दशक में यहां प्रैक्टिस करते हुए मैंने इस हेरिटेज भवन में हमेशा एक ऊर्जा और प्रेरणा पाई है। इसे भुलाना वाकई मुश्किल है। राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील जोशी ने कहा कि आज ऐसा महसूस हुआ, जैसा किसी पिता को अपनी बेटी के विदाई पर होता है। यह हमारे लिए भावनात्मक समय है कि हम अपनी एक कर्मभूमि छोडकऱ नई कर्मभूमि के लिए कदम बढ़ा रहे हैं। अतिरिक्त महाधिक्ता संदीप शाह का कहना है कि यह भावुक करने वाला पल है। अब हमें नए भवन में जाना है, पर हम इस हेरिटेज भवन से भी जुड़े रहेंगे। बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के सदस्य बलजिंदरसिंह संधू ने कहा, हेरिटेज भवन ने न केवल न्याय के मंदिर की प्रतिष्ठा अर्जित की, बल्कि इसका शिल्प हमें आकर्षित करता रहेगा।
विदाई समारोह आयोजित
राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से शाम को हाईकोर्ट परिसर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में जस्टिस एन.एन. माथुर ने ऐतिहासिक भवन की विरासत और नए भवन की खासियत पर वकीलों के बीच अपनी बात रखी। अधिवक्ता के रूप में हम सब यहीं पले-बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के नए भवन में पुराने भवन की आत्मा है। पुराने भवन में जिस तरह कोर्ट रूम आमने-सामने बने हुए हैं, जिससे वकीलों को एक से दूसरे कोर्ट में आने-जाने में आसानी रहती है, उसी तरह की सुविधाओं का खयाल नए हाईकोर्ट में रखा गया है। उन्होंने जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास द्वारा इस खास मौके पर लिखी गई कविता की पंक्तियां भी सुनाई।
Published on:
6 Dec 2019, 10:59 AM IST
बड़ी खबरें
View Allजोधपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.