
विकास चौधरी
Rajasthan News: मारवाड़ में बरसों से अफीम और डोडा पोस्त का सेवन आम है, लेकिन पिछले कुछ सालों से स्मैक व एमडी ड्रग्स भी पांव पसार चुका है। वहीं, गांजे के सेवन में बढ़ोतरी हुई है। नारकोटिक्स कन्ट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले तीन सालों में गांजे की तस्करी दो से तीन गुना तक बढ़ चुकी है। जिम्मेदारों की मानें तो अधिकांश खपत उच्च शिक्षण संस्थाओं के आसपास, हुक्का बारों व छोटी-छोटी थड़ियों पर हो रही है। एनसीबी के क्षेत्रीय निदेशक घनश्याम सोनी के अनुसार मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही हैं। एमडी ड्रग्स बनाने की लैब से लेकर बड़ी मात्रा में गांजा जब्त किया था। मुख्य तस्करों तक को पकड़ने की कोशिश है।
जोधपुर में हुक्का बारों की बाढ़ सी आ गई थी। फिलहाल इन पर काफी अंकुश लगा है और ऐसे हुक्का बार बंद हो गए हैं। इन हुक्का बार और नागौर रोड पर आइआइटी, एनएलयू व अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं के आसपास गांजे की खपत होती है। सिगरेट में गांजा भरकर छात्र सेवन करते हैं। पुलिस स्टेशन करवड़ और मथानिया भी गांजा जब्त कर चुकी है।
जोधपुर और बीकानेर में गांजे की बहुतायत में तस्करी की जा रही है। यह गांजा ओडिशा व आंध्रप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से जोधपुर लाया जा रहा है। एनसीबी ने गत 23 मई को झालामण्ड बाईपास व गुड़ा बिश्नोइयान गांव में दबिश देकर 850 किलो गांजा जब्त किया था, जो सबसे बड़ी कार्रवाई मानी गई थी।
शिक्षण संस्थाओं के आस-पास ही नहीं बल्कि शहर में कई स्थानों पर चाय व अन्य थड़ियों पर भी गांजा व अन्य मादक पदार्थ बेचा जाता है। अधिकांशत: युवा वर्ग ही गांजे का सेवन करने में लिप्त हैं।
Updated on:
26 Jun 2024 11:06 am
Published on:
26 Jun 2024 10:48 am
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