
Rajasthan News: आधुनिक दौर में आज भी कई इलाकों में बेटियों से ज्यादा बेटों को महत्व दिया जाता है, समाज में कई ऐसे लोग भी होते हैं, जिनके घर बेटी नहीं होने पर उनके मन में कन्यादान नहीं कर पाने की एक कसक होती हैं। वो चाहते हैं कि काश उनके घर में बेटी होती तो वो अपनी जीवन की कमाई का कुछ हिस्सा अपनी बेटी का कन्यादान कर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुण्य के सहभागी बन सकते। इसी से जुड़ा एक मामला सेतरावा के निकटवर्ती जैतसर में हुआ, जिसमें एक परिवार ने अपने घर में बेटी नहीं होने पर पीपली का विवाह करवाकर कन्यादान किया। जैतसर निवासी इन्द्रसिंह पुत्र शिवदानसिंह राठौड़ के चार पुत्र हैं। उनके पुत्रों के परिवार में तो बेटियां हैं, लेकिन इन्द्रसिंह खुद के कोई पुत्री नहीं हैं।
उनके घर के कुछ दूरी पर राजकीय उपस्वाथ्य केन्द्र में एक पीपली का पौधा था, जहां पर कार्यरत एएनएम पुष्पादेवी के सहयोग से गांव की महिलाओं व बालिकाओं ने उसे बड़ा किया था। जहां पर इन्द्रसिंह की धर्मपत्नी सोमकंवर भी धार्मिक कार्यो में हिस्सा लेतीं थी। यह वृक्ष बड़ा होने पर इन्द्रसिंह- सोमकंवर दोनों पति-पत्नी ने पीपली विवाह की इच्छा जताई। एएनम पुष्पादेवी की प्रेरणा स्वरूप यह आयोजन किया गया।
परिवार की ओर से गांव के पंडित से इस शादी का मुर्हुत निकलवाया गया। बुध पूर्णिमा की रात को पीपली विवाह की तारीख तय की गई थी, जिसके कार्ड पूर्व में सोशल मीडिया के जरिए ग्रामीणों तक पहुंचाये गए। सभी ग्रामवासियों को निमंत्रण भेजा गया।
जैतसर से 6 किमी दूर सेतरावा कस्बे के श्री कृष्ण मंदिर परिसर से बारात रवाना हुई। जैतसर उपस्वास्थ्य केन्द्र विवाह स्थल पहुंचने पर बारात का गाजे-बाजे से स्वागत हुआ। संभेला में सेतरावा से आए लोग जहां बाराती थे, वहीं जैतसर व पदमपुर ग्रामवासियों की ओर से वधु पक्ष की रस्में अदा की गईं।
तय मुहूर्त पर शाम 7 बजे से कार्यक्रम शुरू हो गए। पीपली के पेड़ को विशेष रूप से सजाया गया था। इसके बाद तोरण और फेरों की रस्म हुई। वहीं आयोजक परिवार की ओर से माता-पिता के रूप में इन्द्रसिंह व धर्मपत्नी सोमकंवर ने जोड़े के रूप में बैठकर आहुतियां दीं। महिलाओं ने मंगल गीत गाए। पंडित मदनलाल शर्मा द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विवाह की रस्में पूर्ण करवाई गईं। कन्या के भाई के रूप में प्रेमसिंह, मामा के रूप में मनोहरसिंह सुवालिया ने अपनी भूमिका अदा की। ठाकुरजी मंदिर पुजारी तुलसीदास व संत बालदास का सानिध्य रहा। नन्हें पौधे से पेड़ बने पीपली को पाल-पोष कर बड़ा करने वाली एएनएम पुष्पादेवी सभी रस्मों को पूर्ण करवाने में साथ में जुटी थीं।
आयोजक परिवार की ओर से पीपली विवाह व कन्यादान की रस्म पूरी होने के बाद ग्रामवासियों की बारी आई, जिसमें सभी ने उत्साह से भाग लिया। बुध पूर्णिमा व पीपली विवाह के शुभ अवसर पर दान पुण्य में हर कोई भागीदार बना। ग्रामीणों ने नकद के अलावा पोशाक-सूट, सिंणगार व सोना-चांदी के जेवरात भी तुलसी को कन्यादान के रूप में भेंट किए। छात्रनेता मूलसिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया। बारात को प्रीतिभोज के बाद विदा किया गया। विवाह समारोह में देवराज रावसा मोतीसिंह सोमेसर, भोमगिरी, नखतगिरी, मोहनगिरी, जुगताराम सुथार, अचलसिंह भाटी, कालूसिंह, मालमसिंह, नरपतसिंह, पपाराम सुथार, आसूराम चौधरी, देवाराम मेघवाल, विजयसिंह भीड़कमल, झूमरलाल दर्जी, गेपरराम नाई, उपसरपंच मदनसिंह, पूर्व उपसरपंच फतेहसिंह, उगमसिंह चांदसर, कवराजसिंह सोमेसर, राधेश्याम शर्मा, छोटुसिंह चांदसर, छोगाराम सुथार, उम्मेदसिंह अनोपगढ़ सहित सैकड़ो की संख्या में जैतसर व पदमपुर ग्राम पंचायतवासी उपस्थित थे।
Updated on:
26 May 2024 11:05 am
Published on:
25 May 2024 04:48 pm
बड़ी खबरें
View Allजोधपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
