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Rajasthan Rains: मानसून में होगी कितनी बारिश, दो बच्चों ने 2 घंटे तक किया अनुष्ठान, फिर हुई ऐसी भविष्यवाणी

Rajasthan Rains: बालकों के हाथ में दो बांस की पट्टिकाएं थमाई जाती हैं। सुकाल का संकेत देने वाली एक बांस पट्टिका पर कुंकुम और काल का संकेत देने वाली दूसरी बांस पट्टिका पर काजल लगाया जाता है।

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Rajasthan monsoon forecast

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Rajasthan Rains: जोधपुर में सदियों से आयोजित पारम्परिक धार्मिक अनुष्ठान ‘धणी’ में इस बार मारवाड़ में अकाल पर सुकाल के भारी रहने के संकेत मिले हैं। घांची समाज के सोजतिया बास घांची समाज विकास समिति की ओर से अक्षय तृतीया के दिन बाईजी का तालाब क्षेत्र स्थित घांची समाज की बगीची में आयोजित अनुष्ठान में अकाल व सुकाल के बीच कांटे की टक्कर रही। अनुष्ठान के शुरुआत में शांति व स्थिरता के संकेत मिले, लेकिन एक घंटा पूर्ण होने के बाद अकाल व सुकाल के बीच रण और उतार-चढ़ाव का दौर आयोजन के अंतिम समय तक चलता रहा।

होगी अच्छी बारिश

सुकाल के संकेत मिलने से इस बार अच्छी बारिश होने से जमाना अच्छा होगा और लोगों के जीवन में समृद्धि बनी रहेगी। समिति के सचिव कमलेश भाटी ने बताया कि धार्मिक अनुष्ठान में समाज के अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार सोलंकी, किशोरचन्द भाटी, चंद्रप्रकाश परिहार, राधेश्याम बोराणा, मूलचन्द भाटी, श्रीकिशन भाटी, राजेन्द्र भाटी, श्याम भाटी, मनोहरलाल भाटी ,कैलाश परिहार, नरेश धाणदिया, गौरीशंकर बोराणा, संगीता सोलंकी आदि ने भागीदारी निभाई। धणी की इस भविष्यवाणी को देखने घांची समाज के प्रबुद्धजन, महिलाएं और अन्य समाज के लोग भी भारी संख्या में मौजूद रहे।

ऐसे होती है भविष्यवाणी

धणी के संकेत जानने के लिए यज्ञ वेदी के पास खंभ स्थापित करते है। खंभ के आमने-सामने दो बाललों को खड़ा किया जाता है। इन बालकों के हाथ में दो बांस की पट्टिकाएं थमाई जाती हैं। सुकाल का संकेत देने वाली एक बांस पट्टिका पर कुंकुम और काल का संकेत देने वाली दूसरी बांस पट्टिका पर काजल लगाया जाता है। मंत्रोचार व यज्ञ जाप से बालकों में भाव आने से बांस पट्टिका में हलचल होती है और वे अपने आप ऊपर व नीचे होने लगती हैं। अंत में ऊपर रहने वाली एक पट्टिका से भविष्य के संकेत का पता चलता है, जिसकी घोषणा समाज के बुजुर्ग लोग करते हैं। इस बार यह प्रक्रिया करीब दो घंटे तक चली, जिसमें अच्छी वर्षा के संकेत मिले हैं। समिति अध्यक्ष गंगाराम सोलंकी ने बताया कि करीब दो घण्टे तक चले धार्मिक अनुष्ठान के दौरान कुल 8 बालकों को शामिल किया गया, जिसमें से दो बालकों का चयन हुआ।

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