
विकास चौधरी/जोधपुर. हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में चीफ इंजीनियर पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले दीनदयाल वर्मा और उनके पारिवर के सदस्यों ने 65 लाख रुपए संजीवनी क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी में निवेश किए थे। अधिकांश राशि एफडीआर में है। परिपक्व होने पर करीब नब्बे लाख रुपए मिलने चाहिए। अब 72 वर्षीय सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर को हार्ट की सर्जरी (एमआइसीएस) करवानी है।
उनके पुत्र सर्जरी कराने को तैयार हैं, लेकिन उसूलों पर अडिग वर्मा संजीवनी में जमा खुद की कमाई वाली राशि से ही सर्जरी कराने पर अड़े हुए हैं। सोसायटी के ऑफिस बंद हो चुके हैं। भुगतान एक जून से ही बंद किया जा चुका है। भदवासिया में तिलक नगर निवासी शांतिस्वरूप वर्मा ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि उनके पिता दीनदयाल वर्मा ने वर्ष 2000 में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड से चीफ इंजीनियर पद से सेवानिवृत्ति ली थी।
संजीवनी क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी वर्ष 2007 में शुरू हुई। इसके दो वर्ष बाद जोधपुर में इसका कामकाज शुरू हुआ। वर्मा ने अपनी जिंदगी भर की कमाई के 45 लाख रुपए सोसायटी में निवेश कर दिए। पुत्र शांतिस्वरूप व अन्य पारिवारिक सदस्यों ने भी बीस लाख रुपए निवेश किए।
दिल के मरीज वर्मा की गत जून में एंजियोग्राफी कराई गई थी। चिकित्सक मल्टी ब्लोकेज बता रहे हैं। उन्हें एमआइसीएस सर्जरी करानी है। जो बेंगलूरु में होती है। इसके लिए छह लाख रुपए की आवश्यकता है। दोनों पुत्र सर्जरी कराने को तैयार हैं, लेकिन दीनदयाल वर्मा खुद की कमाई से ही ऑपरेशन करवाना चाहते हैं। उनका कहना है कि सोसायटी में निवेश की गई राशि मिलने पर ही सर्जरी कराएंगे।
पुत्र की पढ़ाई व भविष्य के लिए निवेश किए थे
हेल्थ एण्ड न्यूट्रिशियन सलाहकार शांतिस्वरूप वर्मा के सोसायटी में 4-5 लाख रुपए जमा है। पुत्र छोटा है। उसकी पढ़ाई व भविष्य की जरूरतों के लिए निवेश किए थे। छोटे भाई के भी तेरह लाख रुपए सोसायटी में जमा है।
निवेशक को ही एडवाइजर बनाया
सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर दीनदयाल वर्मा ने जीवनभर की कमाई संजीवन क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी में निवेश करनी शुरू की तो संचालकों ने उन्हें एजेंट बना दिया और निवेश करवाने के लिए एजेंसी दे दी। वर्मा ने परिवार के सदस्यों के नाम 65 लाख रुपए निवेश कर दिए। फिर उन्हें सोसायटी में एडवाइजर बना दिया गया।
Published on:
20 Sept 2019 10:39 am
