
जोधपुर। इस बार नवरात्रि कई शुभ संयोग लेकर आई है। इस बार नवरात्रि का हर दिन शुभ रहेगा। नवरात्रि में प्रत्येक दिन शुभ योग और संयोग बन रहे हैं। इन दिनों में पूजा-पाठ ही नहीं होंगे, बल्कि ये नौ दिन खरीदारी व निवेश के लिए भी शुभ माने गए है। 15 से 23 अक्टूबर तक तिथि, वार और नक्षत्रों से मिलकर सर्वार्थसिद्धि, राजयोग, त्रिपुष्कर, अमृतसिद्धि और रवियोग बन रहे हैं।
नवरात्रि में कब कौन से योग बनेंगे
- 15 अक्टूबर - पद्म और बुधादित्य योग
- 16 अक्टूबर- छत्र योग, स्वाति नक्षत्र और भद्रा तिथि का संयोग
- 17 अक्टूबर- प्रीति, आयुष्मान और श्रीवत्स योग
- 18 अक्टूबर- सर्वार्थसिद्धि और अमृतसिद्धि योग
- 19 अक्टूबर - ज्येष्ठा नक्षत्र और पूर्णा तिथि संयोग
- 20 अक्टूबर- रवियोग, षष्ठी तिथि और मूल नक्षत्र का संयोग
- 21 अक्टूबर- त्रिपुष्कर योग
- 22 अक्टूबर- सर्वार्थसिद्धि और रवियोग
- 23 अक्टूबर- सर्वार्थसिद्धि और रवियोग
हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
नवरात्रि के पहले दिन के आधार पर मां दुर्गा की सवारी के बारे में पता चलता है। नवरात्रि में माता की सवारी का विशेष महत्व होता है। माता हाथी पर सवार होकर धरती पर आ रही हैं। हाथी पर माता का आगमन इस बात की ओर संकेत कर रहा है कि इस साल खूब अच्छी वर्षा होगी और खेती अच्छी होगी। देश में अन्न धन का भंडार बढ़ेगा। इस बार रविवार को नवरात्रि शुरू होने पर देवी हाथी पर सवार होकर आएंगीं, जो कि सुख-समृद्धि का संकेत है। वहीं 23 अक्टूबर को नवरात्रि का आखिरी दिन रहेगा। इस दिन सर्वार्थसिद्धि और रवियोग बनने से देवी की विदाई भी शुभ रहेगी।
शारदीय नवरात्रि की तिथियां
- 15 अक्टूबर- मां शैलपुत्री (पहला दिन) प्रतिपदा तिथि
- 16 अक्टूबर - मां ब्रह्मचारिणी (दूसरा दिन) द्वितीया तिथि
- 17 अक्टूबर- मां चंद्रघंटा (तीसरा दिन) तृतीया तिथि
- 18 अक्टूबर- मां कुष्मांडा (चौथा दिन) चतुर्थी तिथि
- 19 अक्टूबर- मां स्कंदमाता (पांचवा दिन) पंचमी तिथि
- 20 अक्टूबर- मां कात्यायनी (छठा दिन) षष्ठी तिथि
- 21 अक्टूबर- मां कालरात्रि (सातवां दिन) सप्तमी तिथि
- 22 अक्टूबर- मां महागौरी (आठवां दिन) दुर्गा अष्टमी
- 23 अक्टूबर- महानवमी, (नौवां दिन) शरद नवरात्र व्रत पारण
- 24 अक्टूबर - मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन, दशमी तिथि (दशहरा)
हर आयु की कन्या का होता है अलग महत्व
- 2 साल की कन्या को कौमारी कहा जाता है। इनकी पूजा से दुख और दरिद्रता खत्म होती है।
- 3 साल की कन्या त्रिमूर्ति मानी जाती है। त्रिमूर्ति के पूजन से धन-धान्य का आगमन और परिवार का कल्याण होता है।
- 4 साल की कन्या कल्याणी मानी जाती है। इनकी पूजा से सुख-समृद्धि मिलती है।
- 5 साल की कन्या रोहिणी माना गया है। इनकी पूजन से रोग-मुक्ति मिलती है।
- 6 साल की कन्या कालिका होती है। इनकी पूजा से विद्या और राजयोग की प्राप्ति होती है।
- 7 साल की कन्या को चंडिका माना जाता है। इनकी पूजा से ऐश्वर्य मिलता है।
- 8 साल की कन्या शांभवी होती है। इनकी पूजा से लोकप्रियता प्राप्त होती है।
- 9 साल की कन्या दुर्गा को दुर्गा कहा गया है। इनकी पूजा से शत्रु विजय और असाध्य कार्य सिद्ध होते हैं।
- 10 साल की कन्या सुभद्रा होती है। सुभद्रा के पूजन से मनोरथ पूर्ण होते हैं और सुख मिलता है।
Published on:
15 Oct 2023 12:02 pm
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