
जोधपुर। राजस्थान सहित पूरी दुनिया में पिछले कुछ समय के दौरान हैडफोन लगाकर सड़कों पर घूमना, रेलवे ट्रैक पार करना या दोपहिया और चौपहिया वाहन और यहां तक कि साइकिल या रिक्शा चलाना फैशन बन गया है। मोबाइल फोन इस शताब्दी का अभूतपूर्व चमत्कार है। बहुत से कामों में यह अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते है। लेकिन एक रिसर्च के अनुसार भारत में प्रत्येक 10 में से 3 व्यक्ति वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करते और गाने सुनते हैं जिस कारण अक्सर लोग दुर्घटना के शिकार होकर मारे जाते हैं। दिन पर दिन यह आकंडा बढ़ता ही जा रहा है। इन हादसों पर रोकथाम के लिए और लोगों को जागरुक करने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में गाड़ी चलाने के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले का ड्राइविंग लाइसेंस तुरंत रद्द करने का निर्देश दिया है।
इसके तहत सड़क हादसों पर रोकथाम के लिए हाईकोर्ट के आदेश के बाद वाहन चलाते समय मोबाइल के इस्तेमाल पर पुलिस ने 12 दिन में 384 चालान बनाए है। परिवहन विभाग ने 20 ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त कर दिए है। दो लाइसेंस दोबारा जांच के लिए पुलिस को लौटाए गए है। इन सबके बावजूद वाहन चलाने वालों पर कोई असर नजर नहीं आ रहा है। शहर की सड़कों पर अब भी कई लोग वाहन चलाते समय मोबाइल को कान में दबाए बात करते देखे जा सकते है। आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने 27 अप्रेल को वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करने वालों के चालान कर परिवहन विभाग को भेजने व लाइसेंस रद्द करने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद यातायात पुलिस ने ऐसे वाहन चालकों के चालान बनाकर उनके ड्राइविंग लाइसेंस जब्त कर प्रतिदिन परिवहन विभाग को भेजने शुरू कर दिए है।
रोजाना 40 से 50 चालान लाइसेंस -
यातायात पुलिस की मानें तो हाईकोर्ट के सख्त रवैये से पहले भी चालान बनाए जा रहे थे। हालांकि ऐसे चालकों के लाइसेंस निरस्त के बजाय निलंबित किए जाते थे। अब प्रतिदिन 40 से 50 लाइसेंस जब्त कर निरस्त करने की अनुशंसा के साथ परिवहन विभाग को भेजे जा रहे है।
मानसिकता बदलने की आवश्यकता -
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त निर्मला विश्नोई ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश जारी होने के बाद से अब तक 384 वाहन चालकों के चालान बनाकर परिवहन विभाग को भेजे गए है। ऐसे वाहन चालकों को मानसिकता बदलने की आवश्यकता है, जो मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाते है।
बीस लाइसेंस निरस्त -
जिला परिवहन अधिकारी द्वितीय गणपत पूनड़ ने बताया कि पुलिस ने जिन वाहन चालकों के फोन पर बात करते हुए फोटो के साथ नाम व पत्ते दिए, उनको अपने पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किए गए। इनमें 20 वाहन चालकों को सुनवाई के लिए बुलाया गया। इनमें से 19 वाहन चालक नहीं आए, इस पर उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए गए। एक वाहन चालक ने अधिकारियों के सामने अपनी गलती स्वीकारी। उसका भी वाहन जब्त कर लिया गया, जबकि दो वाहन चालकों ने गलती नहीं मानी। इस पर पुलिस को सही तरीके से जांच कर वापस नाम भेजने को कहा है।
Published on:
10 May 2018 09:48 am
बड़ी खबरें
View Allजोधपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
