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जोधपुर. पिछले दो दिनों की बात करें तो छोटी-बड़ी खबरों के बीच अपराध जगत में एक या दो कॉलम की जगह घेरने वाली आत्महत्याओं की खबरों में एक छात्र और एक छात्रा की खबर छपी है। हर दिन होने वाली आत्महत्याओं की घटनाओं में तुलना करें तो शायद हम यह फर्क नहीं देख पाएंगे कि दो मासूमों की जिंदगियां लचर शिक्षा नीतियों की भेंट चढ़ गई है। दो जिंदगियां जो न जाने कैसा भविष्य बनाती लेकिन स्कूल और पढ़ाई की कश्मकश के बीच उन्होंने हम लोगों के बीच से अलविदा लेना मुनासिब समझा।
जहां दसवीं की बोर्ड परीक्षा में फेल होने पर एक किशोर ने पंचोलिया नाडी स्थित मकान के कमरे में मां के ओढऩे से फंदा लगा कर जान दे दी। तो वहीं श्री रामस्वरूप गणेशीदेवी चिल्का राजकीय आदर्श बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय शास्त्रीनगर में कक्षा 8 की अस्थाई छात्रा चंद्रकला ने भी पिछले दिनों अपनी ईहलीला समाप्त कर दी। अपने इकलौत पुत्र को खोकर परिजन क्षुब्ध हैं तो वहीं छात्रा के घरवाले भी हैरान हैं। वजह महज इतनी ही है कि हमारी शिक्षा नीति कितनी कमजोर हो चली है। शिक्षा सिर्फ स्कूली स्तर तक नहीं वरन घरवालों की ओर से सिखाए जाने वाले नैतिकता और सहनशीलता के पाठ भी। पढ़ाई और मित्रों के साथ प्रतिस्पर्धा के दबाव में शिक्षा के क्षेत्र में थोड़ा भी विचलन आने पर जिंदगी दांव पर लगा देते हैं। ऐसे में क्या यह जरूरी नहीं है कि नित्य पाठ्यक्रम के साथ बच्चों को जिंदगी जीने की कला भी सिखाई जाए...?
उल्लेखनीय है कि पंचोलिया नाडी निवासी चिरंजीव (16) पुत्र श्यामलाल वाल्मीकि ने मां के ओढऩे से फंदा लगा आत्महत्या की है। मर्ग दर्ज करने के बाद शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजन को सौंपा गया है। परिजन का कहना है कि मृतक चिरंजीव दसवीं की बोर्ड परीक्षा में फेल हो गया था। आशंका है कि उसने इसी के चलते जान दी। वहीं मूलत: नेपाल में टीकापुर हाल शास्त्रीनगर सेक्टर ए निवासी ललित बहादुर की पुत्री चन्द्रकला के फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतका के पिता ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत में लिखा है कि उसकी पुत्री पढ़ाई करना चाहती थी, लेकिन ऐसा नहीं होता देख उसने आत्महत्या कर ली। पुत्री चन्द्रकला ने पांचवीं तक जोधपुर में पढ़ाई की थी। इसके बाद वह नेपाल चली गई थी, जहां उसने 7वीं कक्षा उत्तीर्ण की। फिर वह पिता के साथ जोधपुर आई, जहां चालू सत्र में पिता ने उसका प्रवेश इस विद्यालय में 8वीं कक्षा में दिला दिया था। शुल्क भी जमा करा दिया था, लेकिन नेपाल की नागरिकता होने व 7वीं कक्षा की मूल मार्कशीट व टीसी नहीं होने से उसका प्रवेश रद्द कर शुल्क व दस्तावेज लौटा दिए गए थे। इससे आहत पुत्री ने घर पहुंच खाना खाने के बाद फंदा लगाकर जान दे दी।
Published on:
28 Jun 2018 04:18 pm
