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हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी ने की कैदियों की मजदूरी बढ़ाने की सिफारिश

राजस्थान हाईकोर्ट
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हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी ने की कैदियों की मजदूरी बढ़ाने की सिफारिश

हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी ने की कैदियों की मजदूरी बढ़ाने की सिफारिश

जोधपुर। प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को काम के बदले में समान मजदूरी दिए जाने का निर्धारण करने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी ने कैदियों से करवाए जाने वाले विभिन्न प्रकृति के कार्यों के मद्देनजर वर्तमान में प्रभावी मजदूरी की दरों में अपेक्षित बढ़ोतरी करने की सिफारिश की है। कोर्ट ने दो सप्ताह में इसकी पालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 18 जनवरी को मुकर्रर की है।
वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा तथा न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ ने जेल में बंद की कैदी इंद्रजीतसिंह के प्रार्थना पत्र को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए सुनवाई शुरू की थी। पत्र में कहा गया था कि वर्ष 2015 के बाद जेल में बंद कैदियों को काम के बदले दी जाने वाली मजदूरी में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि इस इसके बाद सामान्य मामलों में सरकार ने न्यूनतम मजदूरी की दरों में कई बार संशोधन किए हैं। इस मामले में न्याय मित्र ने बताया था कि राज्य सरकार ने अकुशल, कुशल तथा अति कुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में वर्ष 2020 तक श्रम कानून के तहत संशोधन किए हैं, लेकिन कैदियों को दी जाने वाली मजदूरी अंतिम बार 17 मार्च, 2015 को बढ़ाई गई थी। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता करणसिंह राजपुरोहित ने सोमवार को सुनवाई के दौरान बताया कि 3 सितंबर को दिए गए निर्देशों की पालना में कमेटी गठित की जा चुकी है, जिसने मजदूरी की दरों मेेंं बढ़ोतरी की सिफारिश की है। उन्होंने पालना रिपोर्ट पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
गौरतलब है कि कोर्ट ने कहा था कि सरकार की ओर से गठित की जाने वाली कमेटी को गुजरात हाईकोर्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय और राजस्थान जेल नियम 31 को ध्यान में रखते हुए सिफारिश करनी होगी। जब तक राज्य सरकार सिफारिशों पर कोई निर्णय नहीं लेती, हर कैदी को मजदूरी का भुगतान सामान्य मामलों में राज्य द्वारा तय की गई संशोधित दरों पर कोर्ट की टिप्पणी को ध्यान में रखते हुुए करने को कहा गया था। सरकार को ऐसी अंतरिम मजदूरी का निर्धारण चार सप्ताह के भीतर करने को कहा गया था।